Lahaul Spiti News: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शांशा में बाल अधिकार, बाल संरक्षण एवं किशोर स्वास्थ्य पर एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चाईल्ड हेल्पलाइन यूनिट, जिला बाल संरक्षण इकाई लाहौल एवं स्पीति तथा शांशा स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
शिविर में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों सहित स्थानीय महिला मंडल शांशा की लगभग 95 सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों और समुदाय को बाल अधिकारों, सुरक्षा कानूनों और स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।
संरक्षण अधिकारी जोगिंदर कुमार ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि बच्चा अपराधी नहीं, बल्कि देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाला व्यक्ति है। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम 2015 के प्रावधानों तथा संकटग्रस्त बच्चों के लिए उपलब्ध कानूनी सुविधाओं को विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि जनजातीय जिले में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 सेवा 24 घंटे और 7 दिन कार्यरत है, जिस पर बच्चे या अभिभावक किसी भी समय मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरा नंद ने जीने, संरक्षण, विकास और सहभागिता के अधिकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, पॉक्सो अधिनियम 2012 और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने महिला मंडल से आह्वान किया कि वे गांव स्तर पर बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं पर कड़ी नजर रखें और ऐसे मामले सामने आने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी की समन्वयक कविता ढीसा ने दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया और कारा के माध्यम से गोद लेने के नियमों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-कानूनी तरीके से गोद लेना दंडनीय अपराध है।
चाइल्ड हेल्पलाइन की काउंसलर शशि धीमान ने छात्र-छात्राओं को गुड टच-बैड टच, साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और मानसिक तनाव से निपटने के व्यावहारिक टिप्स दिए।
पीएचसी शांशा के चिकित्सा अधिकारी डॉ. निर्भय भानु ने किशोरावस्था में शारीरिक व मानसिक बदलावों, माहवारी स्वच्छता, पोषण और नशा मुक्ति पर संवाद किया। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हर बुधवार को किशोर स्वास्थ्य क्लिनिक संचालित होता है।
शांशा स्कूल के प्रधानाचार्य अशोक कुमार ने सभी विभागों का आभार व्यक्त किया और घोषणा की कि जनजातीय क्षेत्र के बच्चों को निरंतर जागरूक करने के लिए विद्यालय में जल्द ही बाल अधिकार क्लब का गठन किया जाएगा।