शून्य विद्यार्थी वाले 100 और स्कूल बंद करने पर पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने सरकार से मांगा पाई पाई का हिसाब

Shanta Kumar_Himachal News

रमेश कंवर: शिमला

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में शून्य नामांकन वाले 100 सरकारी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को डिनोटिफाई किए जाने के बाद राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार की नीतियों और सरकारी धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधा सवाल दागा है कि जब स्कूलों में पढ़ने वाला एक भी बच्चा नहीं था, तो आखिर बिना जरूरत का आकलन किए इन स्कूलों को खोला ही क्यों गया था।

 

77 प्राइमरी और 23 मिडिल स्कूल डिनोटिफाई, 900 संस्थान पहले ही हो चुके हैं बंद

हाल ही में शिक्षा विभाग ने प्रदेश में शून्य विद्यार्थी संख्या वाले 100 सरकारी स्कूलों को डिनोटिफाई करने के आदेश जारी किए हैं, जिनमें 77 प्राथमिक और 23 मिडिल स्कूल शामिल हैं। विभाग ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को औपचारिकताएं पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में यह स्थिति पहली बार नहीं बनी है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसे करीब 900 सरकारी स्कूलों को ताले लग चुके हैं या उन्हें बंद किया जा चुका है।

 

भवन निर्माण और अध्यापकों पर खर्च हुए करोड़ों का कौन देगा हिसाब?

शांता कुमार ने कहा कि एक स्कूल को संचालित करने के लिए नया भवन बनाया जाता है, अध्यापकों की तैनाती होती है, फर्नीचर व बिजली-पानी की व्यवस्था की जाती है। जब स्कूल में एक भी बच्चा नहीं था, तो इन तमाम व्यवस्थाओं पर खर्च हुआ करोड़ों रुपये का सरकारी धन किसके खाते में जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से श्वेत पत्र जारी कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि राज्य में अब तक ऐसे कितने स्कूल खोले गए, कितने बंद हुए और उनके इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल कितना बजट बहाया गया।

 

चुनावी लाभ के लिए बिना योजना संस्थान खोलने पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अक्सर चुनाव के आसपास वोट बैंक साधने के उद्देश्य से बिना दूरदर्शिता और बिना छात्र संख्या का आकलन किए नए शैक्षणिक संस्थान खोल दिए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक स्वार्थ के लिए खोले गए संस्थान कुछ समय बाद बंद करने पड़ते हैं, तो जनता के पैसे की इस तरह बर्बादी की जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

 

विपक्ष से भी सरकार को घेरने और विस्तृत ब्योरा मांगने का किया आग्रह

शांता कुमार ने विधानसभा में विपक्ष के नेताओं से भी आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे पर सरकार से पूरा ब्योरा हासिल करें और सदन के भीतर व बाहर जनता की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोग का जवाब मांगें। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार घटती छात्र संख्या के कारण संसाधनों के युक्तिकरण (रैशनालाइजेशन) की नीति पर काम कर रही है, जिसके तहत जून 2026 में भी शून्य दाखिले वाले 20 स्कूलों को बंद और 73 का विलय किया गया था।

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