कुल्लू के नोरबू नेगी बने सिएरा लियोन में भारत के नए उच्चायुक्त: मनाली से यूनेस्को तक 29 साल का राजनयिक सफर, युवाओं के लिए बने मिसाल

रमेश कंवर: मनाली

Kullu News: पर्यटन नगरी मनाली और पूरे कुल्लू जिले के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है। मनाली के समीप प्रीणी पंचायत के सेथन गांव के निवासी नोरबू नेगी को भारत सरकार द्वारा सिएरा लियोन (Sierra Leone) में भारत का अगला उच्चायुक्त (High Commissioner) नियुक्त किया गया है। वह शीघ्र ही इस नए राजनयिक दायित्व को संभालेंगे।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे नोरबू नेगी की इस उपलब्धि से पूरे कुल्लू जिले और उनके गृह क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी यह नियुक्ति हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है।

 

विदेश मंत्रालय में 29 वर्षों का शानदार अनुभव, 2009 में बने आईएफएस अधिकारी

नोरबू नेगी के पास विदेश मंत्रालय में 29 वर्षों से अधिक का विशाल और उल्लेखनीय प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने वर्ष 1997 में विदेश मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। उनकी प्रतिभा और लगन के बल पर वर्ष 2009 में उनका चयन भारतीय विदेश सेवा (IFS) में हुआ। अपने लंबे राजनयिक करियर के दौरान उन्होंने वाशिंगटन डीसी (अमेरिका), बाकू (अजरबैजान), बहरीन और पेरिस (फ्रांस) जैसे प्रमुख देशों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं।

 

यूनेस्को पेरिस में उप-स्थायी प्रतिनिधि के रूप में दे चुके हैं सेवाएं

उच्चायुक्त पद की नई जिम्मेदारी मिलने से पूर्व नोरबू नेगी ने वर्ष 2023 से 2026 तक पेरिस में यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल में उप-स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। पेरिस में बहुपक्षीय कूटनीति के क्षेत्र में भारत के पक्ष को मजबूती से रखने के बाद अब उन्हें पश्चिमी अफ्रीकी देश सिएरा लियोन में भारत का शीर्ष राजनयिक नियुक्त किया गया है।

 

जगतसुख स्कूल से शुरू हुई शिक्षा, चंडीगढ़ से पूरी की स्नातक की पढ़ाई

मनाली के सेथन गांव के दुर्गम माहौल में पले-बढ़े नोरबू नेगी ने वर्ष 1989 में सरकारी हाई स्कूल जगतसुख से अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके उपरांत उन्होंने चंडीगढ़ का रुख किया और पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से स्नातक (BA) की डिग्री हासिल की। अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय उन्होंने अपने परिवार, विशेषकर पिता सीता राम नेगी और माता चंद्र मति नेगी को दिया है। सीमित आर्थिक साधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और उन्हें चंडीगढ़ भेजकर उच्च शिक्षा दिलवाई।

 

कठिन परिश्रम और लगन से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की प्रेरक मिसाल

दुर्गम पहाड़ी गांव से निकलकर कूटनीति के वैश्विक पटल तक पहुंचने का नोरबू नेगी का यह सफर सिद्ध करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। स्थानीय निवासियों, पंचायत प्रतिनिधियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उनकी इस ऐतिहासिक नियुक्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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