रमेश कंवर: काज़ा
Spiti News: माइनस तापमान और अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच पशुपालन विभाग काज़ा ने स्पीति घाटी में पशु कल्याण की अनूठी मिसाल पेश की है। घाटी में आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद पर अंकुश लगाने और मानवीय संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग ने 30 सितंबर से 21 अक्टूबर 2026 तक तीन सप्ताह का विशेष नसबंदी एवं टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया।
अभियान के दौरान स्पीति के पांच संवेदनशील क्षेत्रों में कुल 165 आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई और उन्हें एंटी-रेबीज के टीके लगाए गए। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग अब तक स्पीति के विभिन्न भागों में कुल 415 आवारा श्वानों की नसबंदी और टीकाकरण संपन्न कर चुका है।
Spiti News: ताबो से पिन वैली तक चली सर्जरी
कार्यकारी सहायक निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन काज़ा डॉ. अनुराधा चौहान ने बताया कि इस सघन अभियान के तहत ताबो, समदो, हुरलिंग, पिन वैली और काज़ा मुख्यालय में शिविर लगाए गए। पशु चिकित्सकों की टीम ने न केवल सुरक्षित शल्य चिकित्सा (नसबंदी) की, बल्कि सभी कुत्तों को जानलेवा रेबीज से बचाने के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन भी लगाई। अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ मनाली स्ट्रेज़ और एनसीएफ किब्बर का भी विशेष सहयोग रहा।
हाड़ कंपाती ठंड में बढ़ जाती है कुत्तों की परेशानी
स्पीति घाटी सर्दियों में शून्य से 20 से 25 डिग्री नीचे चले जाने वाले तापमान और भारी बर्फबारी के लिए जानी जाती है। अत्यधिक ठंड और भोजन की कमी के कारण बेसहारा श्वानों को भारी पीड़ा से गुजरना पड़ता है। कई कुत्ते भूख और कड़ाके की सर्दी की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं। ऐसे में नसबंदी अनियंत्रित प्रजनन को रोककर उनकी आबादी को संतुलित करती है, जिससे घाटी में मानव-पशु संघर्ष और रेबीज का खतरा भी समाप्त होता है।
कठिन हालात में डॉक्टरों की टीम ने संभाला मोर्चा
सीमित संसाधनों और शून्य के करीब गिरते पारे के बीच पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. गुरमेत अंगरूप, कर्मचारी मही पाल सिंह, नीम चंद और राजेश कटोच ने दिन-रात फील्ड में मोर्चा संभाला। इस समर्पित टीम ने एक-एक आवारा कुत्ते को सुरक्षित रेस्क्यू कर सर्जरी और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की प्रक्रिया पूरी की। विभाग का लक्ष्य आने वाले समय में घाटी के अन्य सुदूर गांवों तक इस अभियान का विस्तार करना है।