रमेश कंवर: शिमला
Dhani Ram Shandil: हिमाचल प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अभी से तेज होने लगी है। इसी बीच प्रदेश के स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल के एक हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। 86 वर्ष की उम्र में भी राजनीति में निरंतर सक्रिय रहने के संकेत देते हुए शांडिल ने कहा कि व्यक्ति को हर उम्र में काम करते रहना चाहिए और वह पार्टी तथा जनता की सेवा के लिए हमेशा तैयार हैं।
सोलन विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गए शांडिल के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव लड़ने या न लड़ने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय कांग्रेस पार्टी आलाकमान का ही होगा।
बेटे कर्नल संजय शांडिल की राजनीति में एंट्री और उत्तराधिकार पर सस्पेंस
सोलन सीट से शांडिल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे हैं। शांडिल ने संकेत दिए थे कि वह अपने बेटे और सेना से सेवानिवृत्त कर्नल संजय शांडिल को राजनीति में लाने की इच्छा रखते हैं। कांग्रेस संगठन ने कर्नल संजय शांडिल को प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया है, जिसे उनकी औपचारिक राजनीतिक सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, जब शांडिल से टिकट को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव में सोलन सीट से कौन उम्मीदवार होगा, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान तय करेगा। इससे सोलन में कांग्रेस के प्रत्याशी को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
ससुर और दामाद के बीच चुनावी जंग
सोलन विधानसभा सीट डॉ. धनीराम शांडिल का मजबूत राजनीतिक गढ़ रही है। वे 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार यहां से विधायक चुने गए। सोलन का चुनावी समीकरण तब देश भर में चर्चा का विषय बना जब 2017 और 2022 दोनों चुनावों में शांडिल का सीधा मुकाबला उनके अपने दामाद डॉ. राजेश कश्यप से हुआ, जो भाजपा के उम्मीदवार थे। 2017 के चुनाव में शांडिल ने बेहद करीबी मुकाबले में अपने दामाद को केवल 671 वोटों के अंतर से हराया था। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में 82 वर्ष की उम्र में मैदान में उतरे शांडिल ने अपनी जीत का अंतर बढ़ाकर 3,858 वोट कर दिया और तीसरी बार विधानसभा पहुंचे।
सेना के कर्नल से कैबिनेट मंत्री तक का सफर
20 अक्तूबर 1940 को सोलन जिले के कंडाघाट स्थित बशींल गांव में जन्मे डॉ. धनीराम शांडिल का एक लंबा और गौरवशाली सैन्य करियर रहा है। उन्होंने 1962 से 1996 तक भारतीय सेना में सेवाएं दीं और कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद 1990 के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने 1999 में पहली बार शिमला आरक्षित सीट से हिमाचल विकास कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीतकर 13वीं लोकसभा पहुंचे। 2004 में हिमाचल विकास कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होने के बाद, वह कांग्रेस के टिकट पर दोबारा सांसद चुने गए।
विधानसभा की राजनीति और सरकार में भूमिका
2009 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद शांडिल ने राज्य की राजनीति का रुख किया। 2012 में उन्होंने पहली बार सोलन से विधानसभा चुनाव जीता और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 और 2022 में पुनः चुनाव जीतकर वह वर्तमान में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं।