रमेश कंवर: शिमला
Shimla News: वन्यजीव सप्ताह समारोह-2026 के अंतर्गत राजधानी शिमला के ढल्ली स्थित वाटर कैचमेंट सैंक्चुरी में उद्घाटन समारोह एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
समारोह को संबोधित करते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि ढल्ली कैचमेंट एरिया केवल एक जंगल नहीं, बल्कि शिमला शहर की जल सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और समृद्ध जैव विविधता का मुख्य आधार है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को जल, जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया।
जल सुरक्षा में जंगलों का अहम योगदान
कैचमेंट क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ वर्षा और बर्फ के पानी को संचित रखते हैं, जो गर्मी के दिनों में धीरे-धीरे रिसकर प्राकृतिक जलस्रोतों और चश्मों का पुनर्भरण करता है। ब्रिटिश काल से ही इस क्षेत्र का इतिहास शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों और युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि पानी केवल नलों से नहीं आता, बल्कि इसके पीछे एक पूरा प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र कार्य करता है।
प्लास्टिक प्रदूषण वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा
कार्यक्रम के दौरान कैचमेंट सैंक्चुरी परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा स्कूली बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर नाटक प्रस्तुत किया गया। प्लास्टिक कचरे को वन्यजीवों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए मंत्री ने कैचमेंट क्षेत्र में प्लास्टिक की बोतलों के नियंत्रण के लिए लागू सुरक्षा राशि व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने इस मॉडल को प्रदेश के अन्य वन व वन्यजीव क्षेत्रों में भी लागू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।
विकसित होगा प्रकृति पर्यटन
अनिरुद्ध सिंह ने कैचमेंट क्षेत्र के ट्रेल्स को चरणबद्ध तरीके से इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पार्क में कंप्यूटरीकृत टिकट काउंटर, सख्त चेकिंग व्यवस्था और क्यूआर कोड के माध्यम से पेड़-पौधों व औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक नाम व उपयोगिता की जानकारी देने वाले सूचना पट्ट लगाने का आग्रह किया। इससे पर्यटकों और शोधकर्ताओं को क्षेत्र के इतिहास, जैव विविधता और जल संग्रहण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका से जोड़ने पर जोर
वन्यजीवों के आवासों की सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाने के लिए स्थानीय समुदायों और महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने की वकालत की गई। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करके ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर, मुख्य अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन, अरण्यपाल किरूपा शंकर, प्रीति भट्टारे, शिमला ग्रामीण के डीएफओ अनिकेत, उप अरण्यपाल डॉ. शयनवाज भट्ट, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अशोक ठाकुर, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष राम कृष्ण शांडिल तथा रविंद्र चौहान सहित वन विभाग के अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।