25 September 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।
ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप 25 सितंबर 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार है। शुक्रवार का दिन धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी और मां संतोषी को समर्पित होता है। आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि (अनंत चतुर्दशी) का अत्यंत पवित्र पर्व है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की उपासना करने, श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने और श्रीहरि विष्णु के अनंत रूप का पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और मान-प्रतिष्ठा का वास होता है तथा समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
25 September 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत– भाद्रपद, अमांत– भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल
तिथि: चतुर्दशी (रात 10:48 बजे तक), उपरांत पूर्णिमा तिथि प्रारंभ।
दिन: शुक्रवार
नक्षत्र: शतभिषा (दोपहर 12:12 बजे तक), उपरांत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ।
योग: धृति (दोपहर 03:07 बजे तक), उपरांत शूल योग प्रारंभ।
करण: वणिज (सुबह 10:39 बजे तक), विष्टि / भद्रा (रात 10:48 बजे तक), उपरांत बव करण प्रारंभ।
प्रविष्टे: 09 आश्विन
ऋतु: वैदिक ऋतु – वर्षा, द्रिक ऋतु – शरद
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)
सूर्योदय: प्रातः 06:15 बजे
सूर्यास्त: सायं 06:11 बजे
चन्द्रोदय: सायं 05:43 बजे (25 सितंबर)
चन्द्रास्त: सुबह 05:27 बजे (26 सितंबर)
चन्द्र राशि: चंद्रमा कुंभ राशि पर संचार करेगा (पूरा दिन-रात)।
सूर्य राशि: सूर्य देव कन्या राशि पर गोचर कर रहे हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:39 से 05:27 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:37 बजे तक।
अमृत काल: तड़के 04:32 से सुबह 06:08 बजे (26 सितंबर) तक।
आनन्दादि योग: राक्षस (दोपहर 12:12 बजे तक), उपरांत चर योग।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 10:30 से 12 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 03:12 से शाम 04:42 बजे तक।
कुलिक: प्रातः 07:45 से 09:14 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 08:37 से 09:25 बजे तक एवं दोपहर 12:37 से 01:25 बजे तक।
वर्ज्यम्: शाम 06:47 से रात 08:23 बजे तक।
भद्रा: सुबह 10:39 से रात 10:48 बजे तक (पाताल भद्रा)।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
अनंत चतुर्दशी: भगवान श्रीहरि विष्णु के अनंत रूप का पूजन एवं 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करने का परम पावन पर्व।
गणेश विसर्जन: गणेशोत्सव का समापन एवं श्री गणपति जी का जल में विसर्जन।
शुक्रवार व्रत एवं लक्ष्मी पूजन: धन, समृद्धि और सुख-शांति हेतु देवी लक्ष्मी जी का विशेष अर्चन।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
आज शुक्रवार का दिन है और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अनन्त चतुर्दशी तिथि का अति पावन संयोग है, इसलिए जीवन में सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और सभी विघ्नों के नाश के लिए प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के दौरान ‘ॐ अनंताय नमः‘ मंत्र का जप करते हुए कुमकुम से रंगे 14 गांठों वाले अनन्त सूत्र को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करके पुरुषों को अपनी दाहिनी भुजा और महिलाओं को बाईं भुजा में धारण करना चाहिए। संध्या समय मां लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और खीर का भोग लगाएं। जरूरतमंदों को सफेद वस्तु (जैसे चावल, चीनी या दूध) का दान करना विशेष फलदायी रहेगा।