5 September 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप 5 सितंबर 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज शनिवार है। शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनिदेव और संकटमोचन श्री हनुमान जी को समर्पित होता है। शनिवार के दिन शनिदेव और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने तथा सरसों के तेल का दीपक जलाने से जीवन में सभी संकटों, ढैय्या-साढ़ेसाती के कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि तथा सफलता की प्राप्ति होती है।
5 September 2026 Ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत– भाद्रपद, अमांत– श्रावण
पक्ष: कृष्ण
तिथि: नवमी (रात 09:53 बजे तक), तत्पश्चात दशमी तिथि प्रारंभ।
दिन: शनिवार
नक्षत्र: म्रृगशीर्षा (रात 9:30 बजे तक), तत्पश्चात आद्रा प्रारंभ।
योग: वज्र (मध्यरात्रि 12:46 बजे तक), तत्पश्चात सिद्धि योग प्रारंभ।
करण: तैलित (प्रात: 11:04 बजे तक), उपरांत गर (रात 09:54 बजे तक) तत्पश्चात वणिज प्रारंभ।
प्रविष्टे: 20 भाद्रपद
ऋतु: वैदिक ऋतु – वर्षा, द्रिक ऋतु – शरद
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)
सूर्योदय: प्रातः 06:03 बजे
सूर्यास्त: सायं 06:36 बजे
चन्द्रोदय: मध्यरात्रि 12:19 बजे (6 सितंबर)
चन्द्रास्त: दोपहर बाद 2:22 बजे
चन्द्र राशि: चंद्रमा प्रातः 10:18 बजे तक वृषभ, उपरांत मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य देव सिंह राशि पर गोचर कर रहे हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:28 से 05:16 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:54 से 12:45 बजे तक।
अमृत काल: दोपहर बाद 01:16 से 02:45 बजे तक।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 09 बजे से 10:30 बजे तक। (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 01:54 से 03:28 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 07:44 से 08:34 बजे तक।
भद्रा (विष्टि): आज भद्रा का प्रभाव नहीं है।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
श्री कृष्ण जन्माष्टमी / रोहिणी व्रत: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि के पावन अवसर पर भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव एवं जन्माष्टमी व्रत।
शनिवार व्रत एवं शनिदेव पूजन: शनि ढैय्या, साढ़ेसाती और ग्रह बाधा निवारण के लिए शनिदेव और हनुमान जी का पूजन।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज शनिवार का दिन है और श्री कृष्ण जन्माष्टमी व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी का पावन पर्व है, इसलिए जीवन में सभी कष्टों के निवारण और शनिदेव व श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए प्रातःकाल स्नान के पश्चात पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं। भगवान श्री कृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। किसी जरूरतमंद को काले तिल, उड़द की दाल या काले वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ और सर्वकार्य सिद्धिदायक माना जाता है।