नेपाल त्रासदी से सबकः हिमाचल में अगर घेपन झील टूटी तो 32 जगहों पर मचेगी तबाही, अब अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी, अलर्ट पर लाहौल-स्पीति प्रशासन।

Ghepan Lake Alert Lahaul

Ghepan Lake Alert: 4070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन ग्लेशियल झील के जलस्तर और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की निरंतर निगरानी के लिए सी-डैक तिरुवनंतपुरम के माध्यम से सितंबर माह में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। नेपाल में चीन अधिकृत तिब्बत के ग्लेशियर फटने से हुई तबाही के मद्देनजर लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सुरक्षा व निगरानी के एहतियाती उपायों को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण किरण भड़ाना ने बताया कि इस प्रणाली का सिस्सू झील पर सफल परीक्षण कर आंकड़े प्राप्त कर लिए गए हैं।

 

14 दिनों तक वैज्ञानिक अध्ययन करेगी जीएसआई की टीम

घेपन ग्लेशियल झील से जुड़े संभावित जोखिमों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के 5 विशेषज्ञों की टीम  आज से क्षेत्र का दौरा करेगी। यह टीम 14 दिनों तक रुककर मैपिंग, भूस्खलन व हिमस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के सीमांकन, झील की गहराई और जल प्रवाह का अध्ययन करेगी। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2023 में इसरो ने भी झील का आकार सामान्य से काफी बढ़ने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद जुलाई 2024 में 23 अधिकारियों के दल ने झील का प्रत्यक्ष अवलोकन कर रिपोर्ट सौंपी थी।

 

32 संवेदनशील स्थानों पर होगी हाई फ्लड लेवल मार्किंग

घेपन झील के संभावित फटने की स्थिति में सिस्सू से उदयपुर होते हुए जिले की अंतिम सीमा तक 34 स्थानों को बेहद संवेदनशील चिन्हित किया गया है। इनमें से 32 प्रमुख स्थानों पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत हाई फ्लड लेवल मार्किंग का काम शुरू कर दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों को बाढ़ के संभावित स्तर का स्पष्ट संकेत मिलेगा और आपदा जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

 

जीएलओएफ मॉनिटरिंग कमेटी और लोकल टीमों का गठन

आपदा प्रबंधन की तैयारियों को पुख्ता करने के लिए जिला स्तर पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जा रहा है, जिसमें विशेषज्ञ और पर्वतारोही शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त सिस्सू और शाशिन गांव में लोकल रैपिड रिस्पांस टीम बनाई गई हैं। उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य वैज्ञानिक निगरानी, सामुदायिक प्रशिक्षण और विभागीय समन्वय के माध्यम से लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।

रिपोर्ट: रमेश कंवर 

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