Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी स्थित पवित्र त्रिवेणी एवं बौद्ध तीर्थ स्थल रिवालसर में प्रस्तावित ‘जांसकर सराय भवन’ परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लद्दाख के जांस्कर में उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन किया गया। पदुम और स्तोंगदे के मारपालिंग लमडोन मॉडल स्कूल में आयोजित इन बैठकों की अध्यक्षता लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल के कार्यकारी पार्षद इंजीनियर फुन्चोक टशी ने की। परियोजना का मुख्य उद्देश्य रिवालसर आने वाले लद्दाख, जांस्कर और अन्य हिमालयी क्षेत्रों के बौद्ध श्रद्धालुओं व जनजातीय समुदायों को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक आवास सुविधा उपलब्ध कराना है।
बैठक में जानकारी दी गई कि मंडी जिला प्रशासन के पास रिवालसर में भूमि आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शुरुआती चरण में जमीन का पंजीकरण ‘जांसकर बौद्ध एसोसिएशन’ के नाम पर होगा, जिसे बाद में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर ‘जांसकर सराय भवन संस्था’ को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। कार्यकारी पार्षद फुन्चोक टशी ने भूमि संबंधी कागजी कार्रवाई और अनुवर्ती कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए श्री रिगजिन सम्पेल पिपचा और गुरु पद्मसंभव न्यिंगमा गोम्पा रिवालसर के अध्यक्ष श्री रमेश फरका को अधिकृत किया। जांसकर बौद्ध एसोसिएशन ने भी इस प्रोजेक्ट को पूर्ण सहयोग देने का संकल्प जताया।

बैठक के दौरान गुरु पद्मसंभव न्यिंगमा गोम्पा के अध्यक्ष रमेश फरका ने कार्यकारी पार्षद से मांग उठाई कि लद्दाख के पदुम (जांस्कर) में हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल-स्पीति और पांगी-भरमौर के लोगों के लिए भी ‘ट्राइबल भवन’ हेतु भूमि उपलब्ध कराई जाए। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिस पर कार्यकारी पार्षद ने सकारात्मक रुख दिखाया।
गौरतलब है कि रिवालसर महान बौद्ध गुरु पद्मसंभव की तपोभूमि होने के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है, लेकिन शीतकाल में वहां ठहरने की उचित व्यवस्था न होने से जांस्कर व लद्दाख के श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। सराय भवन के निर्माण से यह समस्या हमेशा के लिए हल हो जाएगी।