School News: बराड़ा में स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े कार्यों के लिए मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। राष्ट्र जागरण मंच ट्रस्ट के संस्थापक अमरिंदर सिंह ने कहा है कि स्कूलों का काम फोन पर करवाने की व्यवस्था पर सरकार और शिक्षा विभाग को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने के लिए गैर-शैक्षणिक कार्यों को कम किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि शिक्षकों को उनका पूरा समय केवल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में मिल सके।
लाखों फीस और वेतन के बाद भी मोबाइल पर निर्भरता क्यों: अमरिंदर सिंह
अमरिंदर सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब निजी व सरकारी व्यवस्था में भारी फीस और शिक्षकों को नियमित वेतन दिया जाता है, तो फिर स्कूल से जुड़े कामकाज के लिए मोबाइल फोन पर निर्भरता क्यों बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार फोन पर काम करने से शिक्षकों का ध्यान पठन-पाठन से भटकता है, जिसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर पर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि स्कूल से संबंधित सभी कार्य परिसर के भीतर ही करवाए जाएं, न कि फोन के माध्यम से, जिससे शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा बच्चों की पढ़ाई पर केंद्रित कर सकें।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता, तकनीक के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल पर समीक्षा की मांग
डिजिटल गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव पर अभिभावकों की चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहते हैं, लेकिन स्कूल के काम फोन पर आने से बच्चे मजबूरी में स्क्रीन टाइम बढ़ा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटकने का खतरा बना रहता है। अमरिंदर सिंह ने संबंधित विभाग और स्कूल प्रबंधन से मांग की है कि शिक्षकों को दिए जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों तथा मोबाइल आधारित जिम्मेदारियों की तुरंत समीक्षा की जाए, ताकि तकनीक का सही और सकारात्मक इस्तेमाल हो सके।