प्रदेश को हरित राज्य बनाने की संकल्पना के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में शामिल नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से मंडी जिले में यात्रियों को आधुनिक, शांत और आरामदायक सफर की सुविधा मिल रही है। इसके साथ ही डीजल बसों की तुलना में परिचालन लागत कम होने से निगम को मात्र 24 दिनों के भीतर 19,31,955 रुपये का शुद्ध वित्तीय लाभ प्राप्त हुआ है।
प्रदेश सरकार ने अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है। पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रति किलोमीटर ऊर्जा लागत में लगभग 12 से 13 रुपये की बड़ी बचत हो रही है। ईंधन खर्च में आ रही इस भारी कमी से न केवल सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की कार्यकुशलता में सुधार हुआ है, बल्कि निगम के घाटे को कम करने में भी यह निर्णय मील का पत्थर साबित हो रहा है।
मंडी और सुंदरनगर डिपो में 25 नई ई-बसों से चमका निगम का राजस्व
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा 17 अगस्त को मंडी जिला के लिए 25 ई-बसों की सौगात दी गई थी। निगम के मंडलीय प्रबंधक उत्तम सिंह के अनुसार, 17 अगस्त से 10 सितंबर की अवधि में मंडी डिपो की 15 बसों ने 60,060 किलोमीटर का सफर तय किया, जिस पर बिजली का खर्च 7.95 लाख रुपये आया, जबकि डीजल बसों पर यह खर्च 19.30 लाख रुपये होता। इस तरह मंडी इकाई को 11,34,260 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। इसी प्रकार सुंदरनगर डिपो की 10 बसों से 7,97,695 रुपये की बचत दर्ज की गई।
लंबी दूरी और स्थानीय रूटों पर दौड़ रही हैं AC बसें
मंडी जिले में इन नई ई-बसों का संचालन मंडी-शिमला, मंडी-पालमपुर, मंडी-चंडीगढ़ और मंडी-शिमला-तुलाह जैसे प्रमुख लंबी दूरी के रूटों के साथ-साथ लोकल रूटों पर भी किया जा रहा है। सुंदरनगर, रिवालसर-नैनादेवी, तांदी, कोटली, बटाहर और दुर्गापुर जैसे क्षेत्रों के यात्रियों को अब धुएं और शोर से मुक्त सफर का आनंद मिल रहा है। ज्वालापुर के इन्द्र ठाकुर, वंशिका जम्वाल और जसवंत कुमार जैसे यात्रियों ने शांत और आरामदायक सफर के लिए सरकार का धन्यवाद व्यक्त किया है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
ई-बसों के निर्बाध संचालन के लिए मंडी बस स्टैंड, वर्कशॉप और सुंदरनगर बस स्टैंड में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर दिए गए हैं। आने वाले समय में जंजैहली में भी चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। चार्जिंग नेटवर्क के मजबूत होने से भविष्य में और अधिक रूटों पर ई-बसें चलाई जा सकेंगी।
शून्य प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी से सुरक्षित हो रहा पर्यावरण
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटी है और जहरीले धुएं से होने वाला प्रदूषण शून्य हो गया है। पर्यावरण संरक्षण और हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है।