Lahaul News: मयाड़ घाटी के करपट गांव में पानी में डूबा पुल, जान जोखिम में डालकर झूले से फसल पार करने को मजबूर किसान

18 घंटे पहले

रमेश कंवर: केलांग

Lahaul News: जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की मयाड़ घाटी स्थित करपट गांव के किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला पुल लगातार पानी में डूबा हुआ है, जिसके चलते ग्रामीण पूरी तरह से कटे हुए हैं। खेतों में इस समय फूलगोभी की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी है और समय पर मंडी न पहुंचने के कारण गोभी अब ओवरसाइज़ होकर खराब होने की कगार पर पहुँच गई है। ऐसे में किसान अपनी कड़ी मेहनत को बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर झूले के सहारे फसल को नदी पार कराने को मजबूर हैं।

फसल को सड़क तक पहुंचाने के लिए किसानों को भारी आर्थिक चपत भी लग रही है। गांव से सड़क मार्ग तक गोभी की एक पेटी पहुंचाने के लिए किसानों को नेपाली मजदूरों को 80 से 100 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। मजदूर और किसान लगभग दो किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय करके फसल को मुख्य सड़क तक पहुंचा रहे हैं, जिसके बाद ही उसे मंडियों के लिए रवाना किया जा रहा है। समय पर उपज न बिकने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।

 

बच्चों की पढ़ाई और परिवार के सपनों पर फिरा पानी, आर्थिक संकट में किसान

करपट गांव के किसानों का कहना है कि उन्होंने इस बार फूलगोभी की अच्छी पैदावार से बेहतर आमदनी की उम्मीद लगाई थी। इसी कमाई से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार की साल भर की जरूरतों को पूरा करने का सपना देखा गया था। हालांकि, प्राकृतिक आपदा और बुनियादी ढांचे के ध्वस्त होने से उनकी साल भर की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है, जिससे पूरा गांव गहरे आर्थिक तनाव में है।

 

महिलाएं भी जोखिम में डालकर पार कर रही झूला, लोक निर्माण विभाग से जल्द पुल बहाली की मांग

गांव की महिलाएं भी अपनी तैयार फसल और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए उफनती नदी पर लगे खतरनाक झूले को पार करने को मजबूर हैं। हालांकि लोक निर्माण विभाग द्वारा क्षेत्र में झूला लगाने का काम शुरू किया गया है, लेकिन ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पक्के पुल से वाहनों और पैदल आवाजाही बहाल नहीं होती, तब तक उनकी मुसीबतें खत्म नहीं होंगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल की तुरंत मरम्मत कराने की गुहार लगाई है।

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