Mandi News: 35 साल बाद हुआ माता अंबिका और देव मार्कंडेय ऋषि का ऐतिहासिक देव मिलन, कांडीखल में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

18 घंटे पहले
Mandi News Dev Milan Kandikhal

Mandi News: देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़ी सदियों पुरानी देव परंपरा का मंडी जिले के कांडीखल में एक बेहद अद्भुत और भावुक नजारा देखने को मिला। करीब साढ़े तीन दशकों के लंबे समय बाद आदिशक्ति माता अंबिका अपने भाई देव मार्कंडेय ऋषि के गृह क्षेत्र कांडीखल पहुंचीं। थाची के प्लाईधार से सैकड़ों देवलुओं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ पहुंचीं माता अंबिका का कांडीखल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।

जैसे ही माता अंबिका और देव मार्कंडेय ऋषि का ऐतिहासिक देव मिलन हुआ, पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा के रंग में डूब गया। इस अलौकिक दृश्य के गवाह बनने के लिए दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु कांडीखल पहुंचे थे। भक्तों ने पुष्प वर्षा कर दोनों देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नाटी व लोकनृत्य का आयोजन किया गया, जिसने देव परंपरा के इस दुर्लभ क्षण को और भी खास बना दिया।

 

संसार पर जब बड़ी आपदा आने वाली होती है, तभी भाई-बहन इकट्ठे होते हैं: माता अंबिका

देव मिलन के बाद माता अंबिका ने अपने गूर के माध्यम से देववाणी की, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान गहराई से अपनी ओर खींचा। माता ने देववाणी में कहा कि जब संसार या क्षेत्र पर कोई बड़ी प्राकृतिक या अन्य आपदा आने वाली होती है, तभी भाई-बहन का इस प्रकार एक साथ आगमन होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 35 वर्षों बाद दोनों का एक स्थान पर मिलना साधारण बात नहीं है और इसके पीछे के गूढ़ कारणों का समय आने पर सभी को स्वतः आभास हो जाएगा।

 

संकेत को लेकर श्रद्धालुओं में चर्चा, माता ने देवभूमि पर बनाए रखा आशीर्वाद

माता की इस रहस्यमयी देववाणी के बाद वहां मौजूद देवलुओं और श्रद्धालुओं के बीच संभावित संकेतों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, माता ने अपने क्षेत्र के साथ-साथ पूरी देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर अपना रक्षा कवच और आशीर्वाद बनाए रखने का आश्वासन भी दिया।

 

दो दिवसीय मेले में हारगी उत्सव और पारंपरिक देव गतिविधियों की धूम

देव मार्कंडेय ऋषि के पुजारी जीवन शर्मा, महेंद्र शर्मा और गूर जयदेव ने बताया कि कांडीखल में आयोजित इस दो दिवसीय मेले में देव मिलन के उपरांत प्रसिद्ध हारगी उत्सव सहित विभिन्न पौराणिक देव कार्य संपन्न करवाए जा रहे हैं। शुक्रवार को भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धार्मिक आयोजन जारी रहेंगे।

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