नग्गर के तीन फुट के सेसराम और चानी: छोटा कद पर दरियादिल इंसान, विदेशी मेहमानों के संस्मरणों में जीवंत हुई कुल्लू घाटी की अनूठी दास्तान

रमेश कंवर: मनाली

Kullu News: 1990 के दशक की बात है, जब हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित ऐतिहासिक नग्गर के पास ‘बोश’ गांव में ब्यास नदी की कलकल करती धारा, देवदार के घने जंगलों और ऊंचे बर्फीले पहाड़ों के बीच तीन अनूठे पात्रों सेसराम, चानी और रोली की चर्चा हर तरफ थी। इनमें सेसराम और चानी देखने में बिल्कुल सामान्य इंसानों जैसे थे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी और खास विशेषता यह थी कि उनकी लंबाई मात्र तीन फीट थी। उनके शरीर का हर अंग आनुपातिक रूप से छोटा और सुडौल था। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को ‘प्राइमोर्डियल ड्वार्फिज्म’ (Primordial Dwarfism) कहा जाता है।

चानी बेहद हंसमुख स्वभाव की थी और उसका जोश ऐसा था कि गांव के दूसरे छोर तक उसकी हंसी गूंजती रहती थी। हालांकि, कम कद-काठी के कारण समाज में उनकी पारिवारिक यात्राओं को लेकर कई तरह की सीमाएं थीं, लेकिन सेसराम और चानी इसके दुर्लभ अपवाद थे। वे चिकित्सीय रूप से भले ही छोटे आकार के थे, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और फिट थे। वे अपने खेतों में दिनभर कड़ी मेहनत करते थे और शाम को अपने घर के बरामदे में बैठकर दुनिया भर से आए पर्यटकों और विदेशी मेहमानों के साथ घंटों विचार-विमर्श करते थे।

बोश गांव नग्गर के पास बसा था, जो कभी कुल्लू रियासत की राजधानी हुआ करता था। यहां राजा सिद्ध सिंह द्वारा 1460 ईस्वी में बनवाया गया नग्गर किला आज भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। इसी ऐतिहासिक और खूबसूरत वादियों के बीच सेसराम का वह घर था, जिसके बरामदे से पहाड़ों का अद्भुत नजारा दिखाई देता था। शुरुआती दौर में उस घर में पानी की सुविधा नहीं थी, लेकिन बाद में जब वहां पाइप से नल का पानी और आधुनिक सुविधाएं आईं, तो वह उस पूरे क्षेत्र का एक खास और आकर्षक ठिकाना बन गया।

 

विदेशी मेहमानों से संवाद और कुलुवी संस्कृति का प्रसार

यह जोड़ा विदेशी मेहमानों से इतनी गहराई से घुल-मिल जाता था कि उन्हें हिंदी के साथ-साथ स्थानीय कुलुवी बोली भी सिखाता था। अस्तित्व, वास्तविकता और पुनर्जन्म जैसे गहरे और दार्शनिक विषयों पर उनके साथ लंबी चर्चाएं होती थीं। एक विदेशी जोड़ा उनके घर के एक हिस्से में नौ साल तक किराए पर रहा और इस अनूठे परिवार से जीवन के कई अनमोल सबक सीखे। सेसराम और चानी की किराएदार रहीं निकोला हेरिंगटन ने इस मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी को सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो आज भी कुल्लू की मिट्टी की खुशबू और वहां की आत्मीयता को जीवंत करती है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि इंसान का कद उसकी लंबाई से नहीं, बल्कि उसके बड़े दिल और जीवन जीने के जज्बे से आंका जाता है।

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