Himachal News: धर्मशाला में बोले राज्यपाल कविंद्र गुप्ता- हिमालय संरक्षण केवल सरकारी प्रयास नहीं, जन आंदोलन बनना जरूरी

2 सप्ताह पहले
Himachal News Governor Kavinder Gupta

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि हिमालय केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और प्राकृतिक जीवन-व्यवस्था का मुख्य आधार है। धर्मशाला में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि हिमालय का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे एक व्यापक जन आंदोलन का रूप देना होगा, तभी राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूती मिलेगी।

राज्यपाल शनिवार को धर्मशाला में ‘हिमालय परिवार’, हिमाचल प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “हिमालय संरक्षण से राष्ट्र निर्माण की ओर” विषयक संगोष्ठी और पुस्तक विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे थे।

अपने संबोधन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हाल ही में नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। जलवायु परिवर्तन, जल संकट, भूस्खलन, वनाग्नि और बादल फटने जैसी घटनाएं चेतावनी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच टकराव के बजाय संतुलन बनाना समय की मांग है। इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन, समयबद्ध पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) और स्थानीय समुदायों के आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक और युवा पौधा लगाने, जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने व प्लास्टिक का उपयोग घटाने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाए, तो यह हिमालय संरक्षण की दिशा में बड़ी ताकत बन सकता है। राज्यपाल ने इस दौरान जारी ‘धर्मशाला घोषणा-2026’ का भी स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर लिखी गई पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें अशोक बेरी द्वारा लिखित पुस्तक ”समरस समाज- विकसित भारत का आधार“ तथा प्रेम कैथ की “हैंडबुक ऑन हिमाचल प्रदेश एक्साइज लॉ“ प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल, हिमालय परिवार के संस्थापक डॉ. इंद्रेश कुमार, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अशोक बेरी, डॉ. परमजीत सिंह गिल, मोहिंदर सिंह सलारिया सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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