हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, जुब्बल और कोटखाई में एंटी-हेल गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

रमेश कंवर: शिमला

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए शिमला जिले के जुब्बल और कोटखाई क्षेत्रों में एंटी-हेल गन के इस्तेमाल पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध सरकारी के साथ-साथ निजी तौर पर लगाई गई सभी एंटी-हेल गन पर लागू होगा।

न्यायालय ने यह कड़ा कदम बागवानी निदेशक द्वारा दायर किए गए एक हलफनामे के बाद उठाया है। हलफनामे के तथ्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि जब हेल कंट्रोल सिस्टम को एक घंटे से अधिक समय तक संचालित किया गया, तो उस दौरान भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे पड़ोसी क्षेत्रों के मौसम और फसल को नुकसान पहुंचने की आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं।

 

एक साल के लिए गन का संचालन बंद रखने के निर्देश

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जब तक इस पूरे मामले की विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक कम से कम एक साल के लिए एंटी-हेल गन का संचालन पूरी तरह बंद रखा जाए। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार से एक विशेष रिपोर्ट भी तलब की है। सरकार को रिपोर्ट में यह बताना होगा कि एंटी-हेल गन बंद करने से आसपास के इलाकों, विशेषकर देवरीघाट और बड़ौनघाट के क्षेत्रों को कोई फायदा पहुंचा है या नहीं। इस फैसले से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के बागवानों ने राहत की सांस ली है।

 

नौणी विश्वविद्यालय कर रहा एंटी-हेल गन तकनीक पर वैज्ञानिक अध्ययन

वर्तमान में एंटी-हेल गन तकनीक और इसके प्रभावों पर डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन द्वारा एक वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। इस अध्ययन को पूरा होने में अभी 4 वर्ष का समय और लगेगा, जिसकी रिपोर्ट का सभी को इंतजार है। मामले की वैज्ञानिक गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने नौणी विश्वविद्यालय को भी इस केस में प्रतिवादी बनाया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट और आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।

 

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने नौणी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के माध्यम से नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वैज्ञानिक अध्ययन के शुरुआती निष्कर्षों को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 8 दिसम्बर 2026 की तारीख तय की है। तब तक के लिए जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में किसी भी तरह की एंटी-हेल गन चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

 

सेब बागवानों और स्थानीय किसानों पर पड़ेगा इस फैसले का असर

जुब्बल और कोटखाई क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सेब उत्पादक बेल्ट माने जाते हैं, जहां ओलावृष्टि से फसल को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर एंटी-हेल गन का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, निचले इलाकों के किसानों का आरोप था कि इन गन के कारण उनके क्षेत्रों में बादल फट रहे हैं या सूखा पड़ रहा है। अदालत के इस अंतरिम आदेश के बाद अब आगामी सीजन में सेब बागवानों को पारंपरिक जाली या अन्य तरीकों पर निर्भर रहना पड़ेगा। क्षेत्र में मौसम चक्र पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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