Himachal News: सेब बागवानों के लिए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की बड़ी पहल, CAN खाद की कमी दूर करने के लिए जेपी नड्डा को लिखा पत्र

20 घंटे पहले

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के समक्ष कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) उर्वरक की भारी किल्लत से आ रही व्यावहारिक समस्याओं को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने केंद्रीय स्वास्थ्य और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के समक्ष यह गंभीर मामला उठाया है। केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में रोहित ठाकुर ने बताया कि सेब उद्योग हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो हर साल प्रदेश की जीडीपी में लगभग ₹6,000 करोड़ का बड़ा योगदान देता है और इससे हजारों परिवार जुड़े हुए हैं। सेब के बगीचों के पोषण के लिए कैन (25% नाइट्रोजन) एक अत्यंत भरोसेमंद और किफायती खाद है, जिसकी उपलब्धता बंद होने से बागवानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

यूरिया और महंगे विकल्पों से मिट्टी को हो रहा नुकसान, पैदावार पर असर

शिक्षा मंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि कैन खाद का उत्पादन बंद होने से बागवान यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और एनपीके जैसे महंगे विकल्पों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों की चिंताओं को साझा करते हुए कहा कि यूरिया का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से सेब के बगीचों की मिट्टी में अम्लता (Acidity) बढ़ रही है, मिट्टी की संरचना बिगड़ रही है और पौधों की जड़ें खराब हो रही हैं। इसके चलते राज्य में सेब का रकबा बढ़ने के बावजूद फलदार पेड़ समय से पहले सूख रहे हैं और प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने केंद्र से उर्वरक कंपनियों को दोबारा कैन का उत्पादन शुरू करने के निर्देश देने की मांग की।

 

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दिया त्वरित जांच का आश्वासन, सरकार बागवानों के साथ

रोहित ठाकुर के पत्र का जवाब देते हुए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया है कि संबंधित विभाग द्वारा इस गंभीर मामले की त्वरित जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हिमाचल के बागवानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। जेपी नड्डा के सकारात्मक रुख के लिए शिक्षा मंत्री ने उनका आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि राज्य के सेब उद्योग को मजबूत करने के लिए जल्द ही कैन खाद की आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी, जिससे किसानों को महंगे उर्वरकों से मुक्ति मिलेगी।

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