हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक ‘घट व पूजा नृत्य’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली प्रख्यात लोक कलाकार और नृत्यांगना फूलां चंदेल (Phoolan Chandel) का निधन हो गया है। 63 वर्षीय फूलां चंदेल पिछले कुछ समय से बोन कैंसर की बीमारी से जूझ रही थीं। एम्स बिलासपुर और पीजीआई चंडीगढ़ में उपचार के बाद जब उनकी स्थिति गंभीर हो गई, तो उन्हें बिलासपुर जिले के घंडालवीं स्थित उनके गृह निवास लाया गया था, जहां रविवार सुबह करीब 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन का समाचार मिलते ही बिलासपुर जिला सहित पूरे हिमाचल प्रदेश के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में कला प्रेमी, स्थानीय निवासी और गणमान्य लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने फूलां चंदेल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की लोक कला को रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों तक पहुंचाने में उनके अतुलनीय योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।
सिर पर मटके और पैरों के नीचे गिलास, अद्भुत संतुलन की मिसाल थीं फूलां चंदेल
फूलां चंदेल का घट और पूजा नृत्य कला प्रेमियों के लिए एक अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव होता था। पानी से भरे गिलासों के ऊपर खड़े होकर नृत्य करना और उसी दौरान सिर पर गड़वियां, मटके तथा जलती हुई मोमबत्तियां संतुलित रखना उनकी विशिष्ट पहचान थी। महज 11 वर्ष की अल्पायु में गांव की बावड़ी से अभ्यास शुरू करने वाली फूलां चंदेल ने अपनी कठोर साधना से इस पारंपरिक कला को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और उन्हें ‘घट नृत्य की जनक’ के रूप में प्रसिद्धि मिली।
रूस-चीन से लेकर दुबई तक बिखेरी हिमाचली संस्कृति की छटा
गांव के छोटे सांस्कृतिक मंचों से अपनी यात्रा शुरू करने वाली फूलां चंदेल ने रूस, चीन, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, दुबई और नेपाल जैसे देशों में भारत और हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया। लोक संस्कृति को सहेजने के लिए उन्होंने ‘नटराज संस्कृति कला मंच’ की स्थापना की, जिसके माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षा विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद भी वह कला साधना में जुटी रहीं।