रमेश कंवर: शिमला
Shimla News: पहाड़ों की रानी शिमला के रिज मैदान पर जाइका वानिकी परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार पारंपरिक, प्राकृतिक एवं रसायन मुक्त उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने रहे। ये उत्पाद स्थानीय निवासियों के साथ-साथ शिमला पहुंचे सैलानियों की पहली पसंद बन गए। वन्यप्राणी सप्ताह के समापन अवसर पर वीरवार को रिज मैदान पर वन मंडल किन्नौर, बंजार, शिमला, रोहड़ू और चौपाल के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री एवं प्रदर्शनी के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए थे।
प्रधान सचिव वन, एम सुधा देवी ने रिज मैदान पर लगाए गए सभी स्टॉलों का विस्तृत मुआयना किया। उन्होंने कहा कि जाइका वानिकी परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूह बेहतरीन उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका में अभूतपूर्व सुधार कर रहे हैं। उन्होंने लाहौल और किन्नौर जैसे दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों से पहुंची महिलाओं के प्रयासों की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इन क्षेत्रों की महिलाएं प्राकृतिक एवं रसायन मुक्त उत्पाद बेचकर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं।
लाहौल का छरमा, किन्नौरी राजमाह और लाल चावल बने आकर्षण का केंद्र
लाहौल का छरमा और किन्नौर के पारंपरिक वस्त्र, देसी घी, लोकल शहद, अचार, किन्नौरी राजमाह, लाल चावल, कोदे का आटा, गर्म जुराबें, पाइन नीडल प्रोडक्ट्स और सीरा-बड़ी जैसे शुद्ध उत्पादों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। इन पारंपरिक और रसायन मुक्त जैविक खाद्य पदार्थों को लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण कारीगरों और महिला समूहों को सीधा वित्तीय लाभ मिल रहा है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों की लगी भीड़
रिज मैदान पर लगाए गए इन स्टॉलों पर बाजार की तुलना में किफायती दामों पर शुद्ध उत्पाद उपलब्ध करवाए गए थे। रसायन मुक्त और गुणवत्तापूर्ण सामग्री खरीदने के लिए दिन भर स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की भारी भीड़ जुटी रही। पर्यटकों ने हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों की खरीदारी में विशेष रुचि दिखाई। प्रदर्शनी के माध्यम से जहां स्वयं सहायता समूहों को बड़ा बाजार मिला, वहीं सैलानियों को हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और जैविक उत्पादों से रूबरू होने का अवसर प्राप्त हुआ।