National News: उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ गठबंधन के शीर्ष नेताओं द्वारा मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी से औपचारिक जवाब मांगा है। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने 10 अक्तूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। पीठ ने पूछा कि यह निर्णय अदालत की किसी पुरानी मौखिक टिप्पणी के आधार पर लिया गया था या इसके पीछे सरकार का कोई स्वतंत्र प्रशासनिक आकलन है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाल में हुए सीजेपी विरोध प्रदर्शन (CJP Protest) के सभी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
12 अक्तूबर के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
‘इंडिया’ ब्लॉक द्वारा 12 अक्तूबर को बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि कोई भी संस्था, राजनीतिक दल या व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता।
राहुल गांधी से मांगा जवाब
राहुल गांधी और 13 अन्य नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना टिप्पणी की कि कोर्ट याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल पूछना चाहता है और उन्हें इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। गौरतलब है कि यह याचिका दायर करने से ठीक पहले विपक्षी नेताओं ने शीर्ष अदालत के रुख को प्रभावित करने के उद्देश्य से मार्च निकाला था, जिस पर अदालत ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।