25 अक्तूबर 2026 का पंचांग: शरद पूर्णिमा व कोजागरी पूजा पर अमृत योग, जानें शुभ मुहूर्त, पंचक समाप्ति, राहुकाल और लक्ष्मी कृपा का महाउपाय

50 मिनट पहले
आज का पंचांग

25 October 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार आज रविवार का दिन है। रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण और जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पूर्वाह्न 11:56 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत वर्ष की सबसे पुण्यदायिनी ‘शरद पूर्णिमा’ (कोजागरी पूर्णिमा) तिथि का आरंभ होगा। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है। इस पावन निशा में मां महालक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण कर ‘को जाग्रति’ (कौन जाग रहा है) पूछती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड धन-वैभव का वरदान देती हैं।

 

25 October 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र

शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)

विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)

मास: पूर्णिमांत- आश्विन, अमांत- आश्विन

पक्ष: शुक्ल पक्ष

तिथि: चतुर्दशी (पूर्वाह्न 11:56 बजे तक), उपरांत पूर्णिमा तिथि आरंभ।

दिन: रविवार।

नक्षत्र: रेवती (सायं 07:22 बजे तक), उपरांत अश्विनी नक्षत्र।

योग: हर्षण (सायं 05:21 बजे तक), उपरांत वज्र योग।

करण: वणिज (पूर्वाह्न 11:56 बजे तक), उपरांत विष्टि (भद्रा) करण (रात्रि 10:52 बजे तक), तत्पश्चात बव करण।

प्रविष्टे: 09 कार्तिक

ऋतु: वैदिक ऋतु – शरद, द्रिक ऋतु – हेमंत।

 

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)

सूर्योदय: प्रातः 06:35 बजे।

सूर्यास्त: सायं 05:35 बजे।

चन्द्रोदय: सायं 04:53 बजे (25 अक्तूबर)।

चन्द्रास्त: प्रातः 06:31 बजे (26 अक्तूबर)।

चन्द्र राशि: चंद्रमा सायं 07:22 बजे तक मीन राशि में रहेगा, उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा।

सूर्य राशि: सूर्य देव तुला राशि में विराजमान हैं।

 

25 अक्तूबर 2026 के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:59 से 05:47 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 से दोपहर 12:27 बजे तक।

अमृत काल: सायं 05:03 से 06:34 बजे तक।

 

25 अक्तूबर 2026: राहुकाल और अशुभ समय

राहुकाल: सायं 04:30 से 06:00 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।

यम गण्ड: दोपहर 12:05 से 01:27 बजे तक।

कुलिक: दोपहर 02:50 से सायं 04:12 बजे तक।

दुर्मुहूर्त: सायं 04:07 से 04:51 बजे तक।

वर्ज्यम्: सुबह 07:57 से 09:28 बजे तक।

 

25 अक्तूबर 2026 के प्रमुख व्रत और पर्व

शरद पूर्णिमा: आश्विन मास की पावन रास पूर्णिमा, चंद्रमा की 16 कलाओं का अमृत उत्सव।

कोजागरा पूजा (लक्ष्मी जागरण): मध्यरात्रि में मां महालक्ष्मी व कुबेर देव का आह्वान एवं धन-धान्य वृद्धि पूजन।

पूर्णिमा व्रत एवं सत्यनारायण कथा: श्री हरि विष्णु के सत्य स्वरूप का पूजन व पूर्णिमा उपवास।

पंचक समाप्ति: सायं 07:22 बजे पंचक का विधिवत समापन।

 

25 अक्तूबर 2026 के लिए विशेष उपाय (Special Remedy)

आज शरद पूर्णिमा और रविवार का पावन संयोग है। प्रातःकाल भगवान सूर्य नारायण को तांबे के पात्र से रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दें। आज सायंकाल गाय के दूध से बनी चावल की खीर तैयार करें और रात्रि में उसे खुले आकाश या चंद्रमा की शीतल चांदनी के नीचे महीन कपड़े से ढंककर रखें, ताकि चंद्रमा की अमृतमयी किरणें उसमें समाहित हो सकें। मध्यरात्रि में मां महालक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित कर ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः’ अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। इसके उपरांत अमृतमयी खीर का भोग मां लक्ष्मी को लगाकर प्रसाद स्वरूप पूरे परिवार में वितरित करें। इस उपाय से रोग-दोषों का नाश होता है, आरोग्य की प्राप्ति होती है और घर में वर्षभर अखंड लक्ष्मी का वास रहता है।

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