रमेश कंवर: केलांग
Lahaul News: जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में बागवानी के क्षेत्र में एक नया और क्रांतिकारी इतिहास रच दिया गया है। घाटी में सेब और आलू के पारंपरिक दबदबे के बीच अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारी मांग में रहने वाले ‘ब्लूबेरी’ फल की सफल पैदावार करके बड़ा धमाका किया गया है। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना के अभिनव सुझाव और बागवानी विभाग के सार्थक प्रयासों व तकनीकी सहयोग से लाहौल घाटी में ब्लूबेरी के उत्पादन की दिशा में यह नई और सफल पहल हुई है। बागवानी विभाग के उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग से गौंधला के प्रगतिशील बागवान प्रताप चंद ने 500 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में ब्लूबेरी के 500 पौधों को सफलतापूर्वक उगाया है, जिनमें जल्द ही फल आने की पूरी संभावना है। उपायुक्त किरण भड़ाना ने इस ब्लूबेरी के ऐतिहासिक ‘अग्रिम पंक्ति स्थल’ (Frontline Demonstration Plot) का विधिवत शुभारंभ किया।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने गत वर्ष कार्यभार संभालते ही महिलाओं, घाटी के किसानों और बागवानों के लिए कार्य करने का संकल्प लिया था, उसी दिशा में यह एक अभिनव पहल है। उपायुक्त ने संभावना जताई कि आलू और सेब के बाद अब ब्लूबेरी का यह नीला सोना लाहौल घाटी के किसानों को आर्थिक रूप से बेहद संपन्न बनाएगा।
12.50 लाख की लागत पर 9.37 लाख की बंपर सब्सिडी: कम भूमि पर अधिक पैदावार का बना मॉडल
उपायुक्त के विशेष आग्रह, मार्गदर्शन व सहयोग से बागवानी विभाग द्वारा केंद्र सरकार की ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ योजना के तहत यह ब्लूबेरी का अग्रिम पंक्ति स्थल तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस अग्रिम पंक्ति स्थल को तैयार करने पर लगभग 12 लाख 50 हजार रुपये का कुल व्यय हुआ है, जिसमें बागवानी विभाग द्वारा बागवान को 9 लाख 37 हजार 500 रुपये का भारी-भरकम अनुदान प्रदान किया गया है।
उपायुक्त ने कहा कि यह कम भूमि पर अधिक पैदावार लेने का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य लोगों और किसानों से इस फल की बागवानी करने के लिए इस अग्रिम पंक्ति स्थल का अवलोकन कर प्रेरित होने का आग्रह किया है और आश्वस्त किया है कि इसके लिए बागवानी विभाग बागवानों की पूरी मदद करेगा।
भारतीय बाजार में सेब-केले से महंगा भाव: सुपरफूड की भारी डिमांड
उपायुक्त ने बताया कि ब्लूबेरी एक छोटा, नीले व बैंगनी रंग का मुलायम बेरी फल है, जिसके घाटी में उत्पादन का पहला प्रयास गौंधला में पूरी तरह सफल रहा है। उन्होंने कहा कि ब्लूबेरी की फसल को घाटी में बढ़ावा देने के लिए किसानों से संपर्क किया जाएगा और उन्हें यथासंभव सहायता भी की जाएगी ताकि वे ब्लूबेरी उत्पादन की ओर कदम बढ़ाएं। उन्होंने बताया कि भारत में इसे अभी भी एक प्रीमियम और एक्जॉटिक फल माना जाता है और सामान्य सेब, संतरा, केला आदि की तुलना में इसका बाजार मूल्य काफी अधिक रहता है।
उपायुक्त ने कहा कि ब्लूबेरी वैक्सीनम प्रजाति का फल है। यह स्वाद में हल्का मीठा और खट्टापन लिए होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिसके कारण शहरी उपभोक्ताओं में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। अगर घाटी के किसान इस फल की बागवानी करें तो आर्थिक रूप से काफी संपन्न हो सकते हैं।
विशेष देखभाल और अम्लीय मिट्टी की जरूरत: भविष्य में आमदनी के बेहतरीन अवसर
उप निदेशक बागवानी मीनाक्षी शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि ब्लूबेरी की खेती सामान्य फलदार पौधों से थोड़ी अलग है। इसे अम्लीय मिट्टी, ग्रो-बैग, नियंत्रित सिंचाई और सही किस्म की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों जैसे पालमपुर, कांगड़ा, मंडी और कुल्लू में भी ब्लूबेरी उगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी देश में इसका उत्पादन अपेक्षाकृत कम है, लेकिन कई राज्यों में तेजी से प्रयोग और व्यावसायिक खेती बढ़ रही है। कश्मीर में भी इसकी व्यावसायिक संभावनाओं पर काम हो रहा है और विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश में ब्लूबेरी की संभावनाएं काफी अच्छी मानी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर घाटी के किसान व बागवान ब्लूबेरी फल की बागवानी की दिशा में कदम बढ़ाएं तो भविष्य में आमदनी की बेहतर संभावनाएं हैं।
ये भी रहे मौजूद
इस मौके पर प्रगतिशील बागवान प्रताप चंद ने उपायुक्त को अपने पॉलीहाउस में उगाई गई ब्लूबेरी के पौधों के बारे में पूर्ण जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर उपस्थित किसानों व बागवानों ने घाटी में कृषि और बागवानी क्षेत्र में आ रही विभिन्न समस्याओं के बारे में भी बताया, जिस पर उपायुक्त ने यथासंभव समाधान का पूरा आश्वासन दिया। इस मौके पर बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और क्षेत्र के अनेक किसान व बागवान मुख्य रूप से उपस्थित रहे।