Shimla: सीपीआरआई में आलू तकनीक पर संवाद, पश्चिम बंगाल के मीडिया दल ने जाना शोध कार्य

2 घंटे पहले
Shimla News CPRI Potato Technology Discussion

रमेश कंवर: शिमला

Shimla: पश्चिम बंगाल में आलू की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोगमुक्त बीज उपलब्ध कराने और आधुनिक बीज उत्पादन तकनीकों के विस्तार को लेकर शनिवार को केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रेस सूचना ब्यूरो कोलकाता और शिमला के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल से आए अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने डॉ. ब्रजेश सिंह की अध्यक्षता में संस्थान के वैज्ञानिकों से चर्चा की। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल में आलू उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना और वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार नई तकनीकों को लागू करना था।

संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि आलू वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित फसल होने के कारण बीज-जनित रोगों के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख आलू उत्पादक राज्य में हाईटेक बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर और ऐरोपोनिक्स तकनीकों के प्रभावी विस्तार से किसानों को स्वस्थ रोपण सामग्री मिलेगी। सीपीआरआई द्वारा विकसित इन आधुनिक बीज प्रणालियों से प्रजनक बीज की गुणवत्ता सुधरेगी और खेत में बीज फसल के रहने की अवधि कम होगी, जिससे उत्पादकता, फसल की गुणवत्ता और किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी होगी।

 

विभिन्न प्रभाग प्रमुखों ने प्रस्तुत की अनुसंधान और प्रसंस्करण की तकनीकें

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के विभिन्न प्रभागों के अध्यक्षों ने आलू अनुसंधान से लेकर कटाई के बाद के प्रबंधन तक की पूरी श्रृंखला की जानकारी साझा की। डॉ. आलोक कुमार ने प्रौद्योगिकी के प्रसार और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, डॉ. जगदेव शर्मा ने उन्नत फसल प्रबंधन, डॉ. संजीव शर्मा ने कीट व रोग नियंत्रण, डॉ. सोम दत्त ने प्रसंस्करण, भंडारण व मूल्य संवर्धन और डॉ. दलामू ने उन्नत किस्मों व बीज तकनीक पर अपने विचार रखे। वैज्ञानिकों ने रेखांकित किया कि संतुलित पोषण, वैज्ञानिक सिंचाई और समेकित कीट प्रबंधन के एकीकृत उपयोग से आलू की खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

 

बीज आत्मनिर्भरता और तकनीक हस्तांतरण के लिए समन्वित प्रयासों पर बल

संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की अनुसंधान पहलों, राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से पश्चिम बंगाल को आलू बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। सीपीआरआई शिमला अपनी उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीकों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में पीआईबी के प्रतिनिधि राजदीप बक्शी ने सभी उपस्थित वैज्ञानिकों, अधिकारियों और मीडिया दल का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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