Kullu News: कुल्लू के 22 वर्षीय आयुष ने पेश की स्वरोजगार की मिसाल, सेब छोड़कर शुरू की एवोकाडो की खेती, एक पेड़ से 36 हजार तक की कमाई

2 घंटे पहले
Kullu News Avocado Farming Success Story Ayush Thakur

रमेश कंवर: कुल्लू

Kullu News: हिमाचल प्रदेश में अब युवा केवल सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाय कृषि और बागवानी के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग कर स्वरोजगार के बेहतरीन साधन तलाश रहे हैं। जिला कुल्लू के शास्त्री नगर निवासी 22 वर्षीय युवा आयुष ठाकुर ने पारंपरिक फसलों और सेब की खेती से हटकर विदेशी फल एवोकाडो (Avocado) की खेती में सफलता हासिल की है। शुरुआत में उनके घर पर शौकिया तौर पर एवोकाडो का एक पौधा लगाया गया था। जब उस पर बेहतर फल आने लगे और बाजार में इसके शानदार दाम मिले, तो आयुष ने इसे व्यावसायिक रूप से अपनाने का फैसला लिया। वर्तमान में आयुष ने अपने खेतों में एवोकाडो के 30 से अधिक पेड़ लगाए हैं, जो महज 4 वर्षों के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं।

आयुष के पिता मान सिंह, जो खुद एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं, अपनी नौकरी के साथ-साथ खेती-बाड़ी से भी जुड़े हैं। उनका मानना है कि वर्तमान में नौकरियां सीमित होने के कारण युवाओं को अपने स्तर पर रोजगार के नए विकल्प तलाशने चाहिए। आयुष न केवल एवोकाडो के पेड़ लगा रहे हैं, बल्कि इसकी नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रमोशन के माध्यम से अपनी नर्सरी के पौधों को कुल्लू के साथ-साथ सोलन और शिमला जिले के बागवानों को 700 रुपये प्रति पौधा की दर से बेच रहे हैं। आयुष ऑनलाइन माध्यमों और इंटरनेट से इस खेती की आधुनिक बारीकियां सीख रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं।

 

800 से 1600 मीटर की ऊंचाई पर सफल है खेती, कम स्प्रे और न्यूनतम रखरखाव का फायदा

एवोकाडो की खेती की तकनीकी बारीकियों पर बात करते हुए आयुष ठाकुर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में समुद्र तल से 800 मीटर से लेकर 1600 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह पेड़ पूरे साल हरा-भरा रहता है और पतझड़ में भी इसके पत्ते नहीं झड़ते। हालांकि, सर्दियों के मौसम में रात को गिरने वाले कोहरे (पाले) से इसे बचाना पड़ता है, क्योंकि पाले से इसके पत्ते झुलस जाते हैं। इसलिए कम कोहरे और अनुकूल तापमान वाले क्षेत्र इसकी बागवानी के लिए बेहद उपयुक्त हैं। अन्य फलदार पौधों की तुलना में एवोकाडो में अत्यधिक कीटनाशक स्प्रे और रासायनिक खादों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इसकी उत्पादन लागत काफी कम आती है और यह बागवानों के लिए एक फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

 

जलवायु परिवर्तन के दौर में सेब का बेहतरीन विकल्प, एक पेड़ से सालाना 36 हजार रुपये तक आय

मौसम में आ रहे बदलावों के कारण कुल्लू घाटी के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसके चलते सेब की बेल्ट अब अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर खिसक गई है। ऐसे में एवोकाडो एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। कुल्लू के कायस क्षेत्र के युवा बागवान अभिषेक ने भी अपने खेत में एवोकाडो के 50 पौधे लगाए हैं। उन्होंने बताया कि अनार की फसल में अधिक स्प्रे के खर्च से बचने के लिए उन्होंने एवोकाडो को चुना है। एक पूर्ण विकसित एवोकाडो का पेड़ प्रति वर्ष 100 से 120 किलोग्राम तक फल देता है। बाजार में एवोकाडो का थोक व खुदरा मूल्य 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाता है, जिससे बागवान को केवल एक पेड़ से ही सालाना 30 हजार से 36 हजार रुपये तक की शानदार आय हो सकती है।

एवोकाडो
एवोकाडो

बागवानी विभाग भी बांटेगा पौधे, बजौरा फल विकास परियोजना ने की पहल की पुष्टि

जिला कुल्लू के बजौरा स्थित फल विकास परियोजना में कार्यरत विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. रोशन आनंद ने बताया कि बागवानी विभाग भी प्रदेश में किसानों और बागवानों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए एवोकाडो की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि कुल्लू जिले में निजी स्तर पर एवोकाडो के पेड़ों पर बहुत अच्छी पैदावार हो रही है। आने वाले समय में बागवानी विभाग स्वयं इसके पौधे तैयार कर क्लस्टर स्तर पर किसानों और बागवानों के बीच वितरित करने की योजना पर कार्य कर रहा है, ताकि क्षेत्र में विविधतापूर्ण बागवानी को नया प्रोत्साहन मिल सके।

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