Kangra News: अवैध जमीन हस्तांतरण व बेनामी संपत्ति मामले में विधायक के पूर्व सहयोगी गिरफ्तार, 13 करोड़ की संपत्ति विजिलेंस जांच के घेरे में

Kangra News Dharmshala Land Scam

Kangra News: हिमाचल प्रदेश में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण, फर्जी राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने और करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति बनाने के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। विजिलेंस ने इस मामले में धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के पूर्व चालक और सहयोगी, रक्कड़ निवासी नेक राम को गिरफ्तार किया है।

300 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों और लगभग 400 कनाल जमीन के फर्जीवाड़े की प्राथमिक जांच के बाद हुई इस कार्रवाई से प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। आरोपी को 1 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे धर्मशाला की विशेष अदालत में दोबारा पेश कर आगे की हिरासत मांगी जा रही है।

विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपी नेक राम के रक्कड़ स्थित आवास पर छापेमारी कर जमीन व संपत्तियों से जुड़े कई अहम दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। जांच में सामने आया कि धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न पटवार सर्किलों में वर्ष 2011 से 2025 के बीच नेक राम, उसकी पत्नी किरण बाला और मां मंगला देवी के नाम पर करीब 400 कनाल जमीन खरीदी गई है।

इसके अलावा रक्कड़ स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बनी एक आलीशान कोठी भी जांच के दायरे में है। विजिलेंस फिलहाल परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन संपत्तियों की खरीद और निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए धन का वास्तविक स्रोत क्या था।

 

सरकारी जमीनों के म्यूटेशन में हेरफेर पर दर्ज हुईं दो अलग-अलग एफआईआर

इस पूरे प्रकरण में विजिलेंस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी जमीन का गलत तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम म्यूटेशन (इंतकाल) किया गया और बाद में बिक्री, गिफ्ट डीड या अन्य दस्तावेजों के माध्यम से हस्तांतरण किया गया। पहले मामले में धर्मशाला के घनियारा, चकबन घनियारा व आसपास के क्षेत्रों का राजस्व रिकॉर्ड जांच के घेरे में है, जहां मालिकाना हक और कब्जे की प्रविष्टियों में हेरफेर का संदेह है।

 

पत्नी के नाम म्यूटेशन के बाद जमीन खरीदने का आरोप, मां का नाम भी रिकॉर्ड में शामिल

दूसरी एफआईआर रक्कड़-सिधवारी क्षेत्र की भूमि से संबंधित है। विजिलेंस के अनुसार वर्ष 2019 में सरकारी जमीन के एक हिस्से के कथित फर्जी म्यूटेशन के उपरांत उसी जमीन को नेक राम की पत्नी किरण बाला के नाम खरीदा गया था। इसके अतिरिक्त एक अन्य संपत्ति के रिकॉर्ड में उसकी मां मंगला देवी का नाम कब्जाधारी के रूप में दर्ज पाया गया है। विजिलेंस इन सभी कड़ियों को जोड़कर वित्तीय लेन-देन की पूरी तस्वीर स्पष्ट करने में जुटी है।

 

13 करोड़ रुपये की संपत्ति की जांच और वर्ष 2007 से अब तक के रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी

धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में पाई गई इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये आंकी गई है। विजिलेंस यह खंगाल रही है कि क्या ये सभी खरीद-बिक्री घोषित आय के अनुरूप थीं। जांच का दायरा वर्ष 2007 से अब तक के सभी संदिग्ध जमीन सौदों तक बढ़ा दिया गया है ताकि वास्तविक लाभार्थियों (Beneficiaries) का पता लगाया जा सके।

 

विधायक सुधीर शर्मा के करीबी होने से गरमाया राजनीतिक माहौल

नेकम राम की गिरफ्तारी के बाद मामले ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है, क्योंकि उन्हें धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा का अत्यंत करीबी माना जाता है। सुधीर शर्मा स्वयं आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद से कांगड़ा जिले सहित पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 

घर पर दबिश देकर दस्तावेज जब्त, परिजनों से वित्तीय लेन-देन पर पूछताछ जारी

गिरफ्तारी से पूर्व विजिलेंस टीम ने रक्कड़ स्थित आवास पर गहन तलाशी अभियान चलाकर जमीन, मकान और बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए। परिजनों से पूछताछ के साथ-साथ विजिलेंस इस बात का भी अध्ययन कर रही है कि इन जमीन सौदों का अंतिम आर्थिक लाभ किस व्यक्ति तक पहुंचा और क्या इसके पीछे कोई छिपकर लाभ उठाने वाला मुख्य बेनामीदार शामिल है।

 

राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों से गठजोड़ की भी गहनता से जांच

जांच का दायरा केवल आरोपी के परिवार तक सीमित न रहकर राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों तक विस्तृत हो गया है। विजिलेंस यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तखत, मुख्तारनामा, जाली कागजात और मूल राजस्व रिकॉर्ड को गायब करने में किस स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियों की भी संभावना व्यक्त की जा रही है।

 

अदालत में पेशी के बाद रिमांड की प्रक्रिया होगी आगे

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार आरोपी को 5 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। अब आरोपी को अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड पर लिया जाएगा ताकि पूरे घोटाले की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके।

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