न धन, न जेवर… सिर पर घास की पूली लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु: बिलासपुर के नंदेश्वर महादेव मंदिर की अनोखी परंपरा, शिवलिंग पर घास चढ़ाकर होती है जीव सेवा

Nandeshwar Mahadev Temple

रमेश कंवर

Nandeshwar Mahadev Temple: देवभूमि हिमाचल के शिवालयों में आमतौर पर श्रद्धालु दूध, जल, बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाते देखे जाते हैं, लेकिन बिलासपुर जिले में भगवान शिव का एक ऐसा अनूठा धाम है जहां भक्तों के हाथों में पूजा की थाली या नोटों की गड्डी नहीं, बल्कि सिर पर हरी घास के गट्ठर और चारे की बोरियां होती हैं। घुमारवीं तहसील के भगेड़ स्थित नंदेश्वर महादेव मंदिर की यह परंपरा आस्था को सीधे जीव सेवा से जोड़ती है, जहां भोलेनाथ को अर्पित किया गया चारा बेसहारा और घायल गौवंश के लिए संजीवनी बन जाता है।

 

मंदिर में नहीं है कोई दानपात्र, शिवलिंग पर चढ़ती है हरी घास

नंदेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई पारंपरिक दानपात्र नहीं रखा गया है। श्रद्धालु जब मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो वे शिवलिंग और परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं के समक्ष घास और चारा ही अर्पित करते हैं। पूजा-अर्चना संपन्न होते ही इस पूरे चढ़ावे को मंदिर से सटे गौसेवा केंद्र में भेज दिया जाता है, जहां घायल, बीमार और लावारिस पशुओं को यह पौष्टिक चारा खिलाया जाता है।

 

2009 की एक घटना ने बदल दी सुनील शर्मा की जिंदगी

इस मंदिर और अनूठी परंपरा की नींव के पीछे एक गहरी मानवीय संवेदना जुड़ी है। बिलासपुर के कोसरियां गांव के निवासी सुनील शर्मा वर्ष 2009 में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। एक दिन भगेड़ से गुजरते समय उन्होंने सड़क किनारे तड़पते हुए एक गंभीर रूप से घायल बेसहारा गोवंश को देखा। उस बेजुबान के असहनीय दर्द ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और उन्होंने मौके पर ही उसकी मरहम-पट्टी और तीमारदारी शुरू कर दी।

 

गौसेवा के लिए छोड़ी नौकरी, शुरू की अनूठी पहल

पशु सेवा के इस संकल्प को व्यवस्थित रूप देने के लिए सुनील शर्मा ने उसी वर्ष प्रगति समाज सेवा समिति और नंदेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। शुरुआत में वे नौकरी के साथ-साथ पशुओं की देखभाल करते रहे, लेकिन बेसहारा गोवंश की बढ़ती संख्या और पूरे समर्पण की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने वर्ष 2014 में अपनी निजी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन गौसेवा को समर्पित कर दिया और मंदिर में नकदी के स्थान पर घास व चारा चढ़ाने की अनूठी परंपरा की शुरुआत की।

आज यह मंदिर केवल कर्मकांडीय पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सच्ची शिवभक्ति का जीवंत केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन दर्जनों श्रद्धालु अपने खेतों से ताजी घास काटकर महादेव के चरणों में अर्पित करते हैं।

खबरें और भी हैं...