Himachal News: मेले में मुख्य अतिथि बनना बीडीओ साहब को पड़ा महंगा, हुए सस्पेंड

2 घंटे पहले

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मेले और त्योहार देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक होने के साथ-साथ राज्य की शान माने जाते हैं। हालांकि, जिला मंडी में आयोजित एक स्थानीय मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करना खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) पवन कुमार को भारी पड़ गया। गोहर विकास खंड में तैनात बीडीओ पवन कुमार को ग्रामीण विकास विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

विभागीय आदेशों के अनुसार, बीडीओ पवन कुमार के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम 10 के तहत यह सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई है। विभाग द्वारा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक जांच भी शुरू कर दी गई है। जारी पत्र में निलंबन का मुख्य कारण सक्षम उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर जारी वैध निर्देशों का पालन और क्रियान्वयन न करना बताया गया है। हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि किस विशिष्ट मामले में अवहेलना हुई है।

 

ख्योड़ नलवाड़ मेले में बने थे चीफ गेस्ट, अगले दिन जारी हुए सस्पेंशन ऑर्डर

बीडीओ पवन कुमार का निलंबन उस समय सामने आया जब गोहर क्षेत्र में जिलास्तरीय ख्योड़ नलवाड़ मेला चल रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, पवन कुमार मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे और उसके अगले ही दिन उनके निलंबन का आदेश जारी हो गया। हालांकि, विभाग के आधिकारिक आदेश में मेले से जुड़ी किसी घटना का सीधा जिक्र नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे इस घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

पंचायत सचिवों के तबादले का मामला भी चर्चा में

निलंबन अवधि के दौरान पवन कुमार का मुख्यालय ग्रामीण विकास विभाग निदेशालय, शिमला निर्धारित किया गया है। सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना उन्हें मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही गोहर विकास खंड की बासा और सेरी पंचायतों के सचिवों के तबादले और कार्यभार न संभालने का मामला भी चर्चा में है। हालांकि, इन तबादलों और बीडीओ के निलंबन के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

विधायक विनोद कुमार ने कार्रवाई को बताया राजनीति से प्रेरित

उधर, नाचन विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक विनोद कुमार ने बीडीओ पवन कुमार के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्ठावान अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारी का क्या पक्ष रहता है और किन सरकारी निर्देशों की अवहेलना की बात सामने आती है।

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