एचपीएमसी ने 2025-26 में किया 214.19 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कारोबार, 12 करोड़ का हुआ मुनाफा

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HPMC: हिमाचल प्रदेश में सेब केवल एक फल नहीं, बल्कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था की धुरी है। राज्य के हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है और इसके इर्द-गिर्द परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, प्रसंस्करण तथा विपणन जैसी अनेक गतिविधियां संचालित होती हैं। हिमाचल में बागवानी को मजबूत करना केवल उत्पादन बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी दृष्टिकोण के साथ राज्य सरकार बागवानी क्षेत्र में उत्पादन से लेकर विपणन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर बल दे रही है। राज्य सरकार का प्रयास यह है कि बागवान की उपज केवल मंडी में पहुंचने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके बाद होने वाली प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन और विपणन गतिविधियों में भी बेहतर आर्थिक अवसर सृजित हों।

इस दिशा में हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (HPMC) की भूमिका लगातार विस्तृत हो रही है। पारंपरिक खरीद व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए निगम ने मण्डी मध्यस्थता योजना (MIS)-2026 के दौरान सेब खरीद प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल प्रणाली से जोड़ा है। इस व्यवस्था में बागवानों के ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर खरीद से संबंधित विवरण दर्ज करने तक की प्रक्रिया डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल कागजी प्रक्रिया को कम करना नहीं, बल्कि खरीद से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना, निगरानी को बेहतर बनाना तथा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।

इस वर्ष अभी तक HPMC ने एमआईएस-2026 के अंतर्गत बागवानों से 4,188.504 मीट्रिक टन सेब खरीदा है। यह खरीद निर्धारित 12 रुपये प्रति किलोग्राम के बाजार हस्तक्षेप मूल्य पर केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी उत्पादन अनेक भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों से जुड़ा है। ऐसी स्थिति में खरीद प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ना रिकॉर्ड प्रबंधन और संस्थागत खरीद व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में सहायक साबित हो रहा है।

 

प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं पर फोकस

हालांकि, बागवानी अर्थव्यवस्था की चुनौतियां केवल खरीद तक सीमित नहीं हैं। बागवान के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि उत्पाद को बेहतर बाजार मिले, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जाए और फल से अधिकतम मूल्य प्राप्त हो। इसी सोच के साथ HPMC की गतिविधियां अब पारंपरिक खरीद से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, बागवानी इनपुट और मूल्य संवर्धित उत्पादों तक विस्तृत हो रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से उपज के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ किसानों को बाजार से जोड़ने और बागवानी उत्पादों का आर्थिक मूल्य बढ़ाने की संभावनाएं विकसित हो रही हैं।

 

मूल्य संवर्धन, जूस निर्माण और वैज्ञानिक भंडारण से फायदा

सेब और अन्य बागवानी उत्पादों को केवल ताजा फल के रूप में बाजार में भेजने के बजाय उनसे जूस और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार करने से उपज के मूल्य में वृद्धि की जा सकती है। इसी तरह वैज्ञानिक भंडारण और पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाएं कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार उत्पाद के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में इसका महत्व और बढ़ जाता है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परिवहन, भंडारण और बाजार तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियां बनी रहती हैं।

 

सेब के वेस्ट का वैज्ञानिक उपयोग और यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली

राज्य सरकार सेब के कचरे के वैज्ञानिक उपयोग और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी बल दे रही है। इसका उद्देश्य बागवानी उत्पादों की बर्बादी कम करने के साथ-साथ प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर पैदा करना और बागवानी अर्थव्यवस्था में नए आयाम जोड़ना है। इसके साथ ही ‘यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली’ के तहत 20 किलोग्राम पैकिंग में मानकों को तय कर सेब कारोबार में पारदर्शिता लाई गई है।

 

214.19 करोड़ का ऐतिहासिक कारोबार और 12 करोड़ का शुद्ध लाभ

HPMC की बदलती भूमिका उसके वित्तीय प्रदर्शन में भी स्पष्ट दिखाई देती है। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने लगभग 214.19 करोड़ रुपये का कुल कारोबार दर्ज किया और करीब 12 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। निगम के इस कारोबार में जूस और प्रसंस्कृत उत्पादों की बिक्री से लगभग 19.17 करोड़ रुपये, बागवानी इनपुट से करीब 18.50 करोड़ रुपये तथा कोल्ड स्टोरेज व पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं से लगभग 6.70 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं एमआईएस से संबंधित कारोबार लगभग 158 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।

 

बागवानी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही नई तकनीक

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा तकनीक, संस्थागत समर्थन, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर दिया जा रहा बल हिमाचल की बागवानी को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। बागीचे से बाजार तक की प्रक्रिया जितनी अधिक संगठित, पारदर्शी और मूल्य-सृजन पर आधारित होगी, उतनी ही अधिक संभावनाएं हिमाचल की बागवानी अर्थव्यवस्था के विस्तार की बनेंगी।

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