रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली, भट्टाकुफर, समिट्री और ढली क्षेत्रों में फोरलेन टनल निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टनल निर्माण के लिए की जा रही ब्लास्टिंग और खुदाई के कारण स्थानीय निवासियों के मकानों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे कई भवनों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति से आक्रोशित पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और निर्माण कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने एनएचएआई पर घटिया स्तर का काम करने और अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एनएचएआई को हिमाचल के हितों और लोगों के जान-माल की कोई चिंता नहीं है। संजौली के हेलीपोर्ट क्षेत्र में खतरे को देखते हुए 4 मकानों को खाली करवा दिया गया है, जबकि करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एनएचएआई ने अपना रवैया नहीं सुधारा तो इस मामले को अदालत तक ले जाया जाएगा।
प्रशासन ने निर्माण कार्य पर लगाई रोक, उपायुक्त ने लिया स्थिति का जायजा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर टनल निर्माण के लिए दी गई अनुमति को तुरंत प्रभाव से वापस लेते हुए काम रोकने के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं। अब सरकार पूरे मामले की तकनीकी व स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराने की तैयारी कर रही है।
हाई पावर कमेटी के गठन की तैयारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर सकते हैं अध्यक्षता
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और मुख्य सचिव के साथ इस विषय पर उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। निष्पक्ष जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें भूवैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि कमेटी की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए ताकि लापरवाही बरतने वाले अफसरों की जवाबदेही तय की जा सके।
शांति विहार वार्ड के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, मुआवजे और अधिग्रहण की मांग
प्रभावित शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर और पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि टनल निर्माण से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए या प्रभावित भवनों का अधिग्रहण किया जाए। प्रभावित लोग जल्द ही अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भी मुलाकात करेंगे।