Himachal News: सराज में आपदा के जख्मों को पीछे छोड़ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवा, वरदान साबित हो रहा ‘अपना पुस्तकालय’

Himachal News Apna Pustakalaya Saraj Thunag Mandi Youth Education

Himachal News: वर्ष 2025 की भीषण आपदा में बहुत कुछ गंवाने के बाद मंडी जिले की सराज घाटी के युवाओं ने एक बार फिर नए हौसले के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। त्रासदी के जख्मों को पीछे छोड़ सराज के युवा अपने सुनहरे भविष्य को संवारने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए हैं।

युवाओं के इस प्रयास में प्रदेश सरकार की पहल पर जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया ‘अपना पुस्तकालय अभियान’ एक बड़ा मददगार और वरदान साबित हो रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण युवाओं को घर-द्वार पर ही उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है।

 

थुनाग के लघु सचिवालय में 13.75 लाख रुपये की लागत से खुला आधुनिक पुस्तकालय

सराज क्षेत्र के थुनाग स्थित लघु सचिवालय में 1 अगस्त 2026 से ‘अपना पुस्तकालय सराज’ का संचालन शुरू किया गया है। लगभग 13.75 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए इस स्व-अध्ययन केंद्र में युवाओं को वाई-फाई, इंटरनेट, कंप्यूटर, प्रिंटआउट और वातानुकूलित व शांत अध्ययन वातावरण प्रदान किया जा रहा है। इस पुस्तकालय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित करीब 600 महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं, जबकि 200 से अधिक पुस्तकें स्थानीय लोगों द्वारा दान की गई हैं। अब तक करीब 56 युवा यहां की सदस्यता ले चुके हैं और 20 से अधिक लाभार्थी नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

 

ओपन कैफे और डिजिटल सुविधाएं भी उपलब्ध

सराज घाटी की बेटियों और युवाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन का आभार जताया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं लम्बाथाच की सरिता ठाकुर ने बताया कि पहले उन्हें निजी पुस्तकालयों में 900 प्रतिमाह शुल्क देना पड़ता था, जबकि अब मात्र 250 वार्षिक शुल्क में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं यूजीसी-नेट और पटवारी परीक्षा की तैयारी कर रहे थुनाग व आसपास के युवाओं ने कहा कि घर के पास इंटरनेट, पीडीएफ प्रिंटिंग, ऑनलाइन पठन सामग्री और ओपन कैफे की सुविधा मिलने से उनकी पढ़ाई को नई गति मिली है।

 

करसोग से शुरू हुई पहल सराज तक पहुंची

एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा ने बताया कि मंडी जिला प्रशासन और उपायुक्त अपूर्व देवगन द्वारा करसोग से शुरू की गई ‘अपना पुस्तकालय’ की पहल अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुकी है। यह पुस्तकालय सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक और अवकाश के दिनों में भी खुला रहता है, जहां पाठकों को दो सप्ताह के लिए पुस्तकें जारी की जाती हैं। यह केंद्र अब सराज घाटी के दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं के सपनों को साकार करने का प्रमुख आधार बन गया है।

खबरें और भी हैं...