Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए नकद इनाम और सरकारी नौकरी का ऐलान किया गया है। हालांकि स्वर्ण पदक विजेता भारतीय महिला कबड्डी टीम की पूर्व कप्तान रितु नेगी को इस इनामी सूची से बाहर रखे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। सिरमौर जिले से ताल्लुक रखने वाली रितु नेगी के स्थान पर टीम की अन्य तीन हिमाचली खिलाड़ियों को ही एक-एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की गई है, जिससे खेल प्रेमियों और उनके परिजनों में भारी रोष है।
रितु नेगी वर्तमान में भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं और उन्हें खेल कोटे के तहत यह नियुक्ति मिली है। उनके पिता शिक्षा विभाग में मुख्य अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। स्थानीय निवासियों और पूर्व खिलाड़ियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि नीतिगत नियमों में ढील देकर रितु नेगी के योगदान को सम्मानित किया जाए।
20 वर्षों तक हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने वाली रितु के साथ शादी के आधार पर भेदभाव का आरोप
रितु नेगी के पिता भवान नेगी ने प्रदेश सरकार के इस फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी ने 20 वर्षों तक हिमाचल प्रदेश के लिए कबड्डी खेली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश व प्रदेश का नाम रोशन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि हरियाणा के पानीपत में विवाह हो जाने मात्र से क्या किसी बेटी का अपने मायके और मातृभूमि से रिश्ता समाप्त हो जाता है। वर्तमान में रितु को किसी भी राज्य सरकार से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है।
तीन कबड्डी खिलाड़ियों को 1-1 करोड़ और पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर का पद
हिमाचल सरकार ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा राणा, भावना ठाकुर और ज्योति को एक-एक करोड़ रुपये देने के साथ पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर पद पर नियुक्ति का ऐलान किया है। इसके अलावा मैराथन में रजत पदक विजेता सावन बरवाल को 2.50 करोड़ और 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक विजेता सीमा कुमारी को 1.50 करोड़ रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने सरकार को घेरा
शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए रितु नेगी को तुरंत एक करोड़ रुपये का इनाम देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारतीय कबड्डी टीम की कप्तानी कर चुकी शिलाई की बेटी के साथ विवाह के आधार पर पक्षपात करना खेल भावना और राज्य के सम्मान के विपरीत है।