रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान और माल रोड को अपनी अद्वितीय कलाकृतियों से वैश्विक पहचान दिलाने वाले अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मूर्तिकार एवं वरिष्ठ चित्रकार प्रोफेसर महेश चंद्र सक्सेना (Prof MC Saxena) का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वर्ष 1934 में जन्मे प्रो. सक्सेना ने जीवनपर्यंत अपनी कला के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और ग्रामीण परिवेश को पत्थर व कैनवास पर जीवंत रूप दिया। उनके निधन से समूचे प्रदेश और देश के कला व सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
Himachal News: ‘हिमबाला’ ने पहाड़ की बेटी को किया अमर
रिज मैदान स्थित जनरल दौलत सिंह पार्क में स्थापित पारंपरिक हिमाचली वेशभूषा में सजी पहाड़ी महिला की कालजयी प्रतिमा ‘हिमबाला’ प्रो. सक्सेना की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है। सिर पर मटका लिए पहाड़ की सादगी, परिश्रम और आत्मीयता को दर्शाती यह प्रतिमा दशकों से शिमला आने वाले लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही है। कला मर्मज्ञों के अनुसार, धूप, बरसात और कोहरे के बीच रिज पर मुस्कुराती ‘हिमबाला’ सिर्फ पत्थर का शिल्प नहीं, बल्कि प्रो. सक्सेना द्वारा पहाड़ की बेटी को अमर करने की जीवंत साधना है।

माल रोड के ऐतिहासिक भित्तिचित्रों (म्यूरल्स) में उकेरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ से संबंध रखने वाले प्रो. सक्सेना 1960 के दशक में शिमला आए और यहीं की आबोहवा में रम गए। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने शिमला के माल रोड की दीवारों पर तीन बड़े हेरिटेज भित्तिचित्र (म्यूरल्स) तैयार किए थे। कास्ट स्टोन पर ब्रॉन्ज फिनिश से तराशे गए ये म्यूरल्स हिमाचल की ग्रामीण और पारंपरिक अर्थव्यवस्था को दर्शाते हैं। इनमें कांगड़ा के चाय बागानों में पत्तियां चुनती महिलाएं, सेब के बागानों में सेब की तुड़ाई-पैकिंग और जनजातीय क्षेत्रों में गद्दी चरवाहों व भेड़पालकों की जीवनशैली को अत्यंत खूबसूरती से उकेरा गया है।
वर्ष 2015 में ललित कला पुरस्कार से हुए थे सम्मानित
समकालीन चित्रकला और मूर्तिकला में उनके विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. एमसी सक्सेना को वर्ष 2015 में प्रतिष्ठित ‘ललित कला पुरस्कार’ से नवाजा गया था। उनकी कृतियों ने शिमला को एक विशिष्ट कलात्मक चेतना और सौंदर्यपरक पहचान प्रदान की। कला प्रेमियों, साहित्यकारों और सामाजिक संस्थाओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एक महान कलाकार कभी नहीं मरता, वह अपनी कृतियों के जरिए सदैव जीवित रहता है। ‘हिमबाला’ और माल रोड के ऐतिहासिक म्यूरल्स के रूप में प्रो. सक्सेना की विरासत शिमला के हृदय में हमेशा अमर रहेगी।