शिमला पुलिस की नशे पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक: PIT-NDPS के तहत इस वर्ष 43 तस्कर निरुद्ध; आदतन सप्लायर कंडा जेल भेजा गया

रमेश कंवर: शिमला

Himachal News: नशे के अवैध कारोबार और नशा तस्करी के संगठित नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए शिमला पुलिस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए निवारक कार्रवाई (Preventive Detention) को तेज कर दिया है। पुलिस की कार्रवाई अब केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि आदतन नशा आपूर्तिकर्ताओं को समाज से अलग रखने के लिए प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट (PIT-NDPS Act, 1988) के कड़े प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पुलिस थाना संजौली ने ठियोग के एक शातिर एवं आदतन चिट्टा तस्कर को औपचारिक रूप से निरुद्ध कर मॉडल सेंट्रल जेल कंडा भेज दिया है।

पुलिस थाना संजौली की टीम ने सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त निरोध आदेश के अनुपालन में सौरभ, निवासी गांव मधान, तहसील ठियोग, जिला शिमला को 2 नवंबर 2026 को PIT-NDPS अधिनियम की धारा 3(1) के तहत निरुद्ध किया। आरोपी सौरभ के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत पहले से दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। वर्ष 2023 में पुलिस थाना ढली में दर्ज प्राथमिकी संख्या 153/2023 के तहत आरोपी से 7.60 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद की गई थी, जबकि वर्ष 2026 में पुलिस थाना संजौली में दर्ज प्राथमिकी संख्या 35/2026 में उससे 8.780 ग्राम चिट्टा जब्त किया गया था।

आरोपी की निरंतर आपराधिक पृष्ठभूमि, नशा आपूर्ति की गतिविधियों और खुफिया विंग की गोपनीय रिपोर्टों के आधार पर शिमला पुलिस ने उसके निरोध का विस्तृत प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को भेजा था। निरोध आदेश की विधिवत स्वीकृति मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया और कानूनी औपचारिकताओं के पश्चात उसे मॉडल सेंट्रल जेल, कंडा (शिमला) भेज दिया गया है, जिससे वह लंबे समय तक समाज और युवा पीढ़ी से दूर रहेगा।

 

अब तक रिकॉर्ड 43 तस्कर निरुद्ध

नशा माफिया के खिलाफ शिमला पुलिस का यह अभियान पिछले वर्षों की तुलना में ऐतिहासिक परिणाम दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, शिमला पुलिस ने अकेले वर्ष 2026 में अब तक रिकॉर्ड 43 आदतन नशा तस्करों को PIT-NDPS एक्ट के तहत निरुद्ध किया है। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में मात्र 3 तस्करों को और वर्ष 2024 में एक भी व्यक्ति को इस कानून के तहत निरुद्ध नहीं किया गया था।

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