Himachal News: नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बोले सीएम सुक्खू, न्यायिक फैसलों और जनहित के बीच हो संतुलन

रमेश कंवर: शिमला

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि लोकतंत्र मंत न्याय केवल अदालती आदेशों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें निष्पक्षता, समझदारी और जमीनी परिस्थितियों की सही समझ भी उतनी ही जरूरी है। जब न्यायिक फैसलों के कारण जनहित में शुरू की गई सरकारी योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में बाधा आती है, तो उनके व्यापक प्रभावों पर पुनर्विचार करना आवश्यक हो जाता है। मुख्यमंत्री रविवार को हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू), शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कुछ न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कई बार भर्ती नियमों में स्पष्ट प्रावधान न होने के बावजूद आर्थिक लाभ देने के निर्देश दिए जाते हैं, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2003 में सरकार ने अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि का लाभ न देने का नीतिगत निर्णय लिया था। हालांकि, करीब दो दशक बाद अदालत ने भर्ती नियमों में संबंधित प्रावधान न होने के बावजूद वित्तीय लाभ देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी निर्वाचित सरकार अपने कर्मचारियों को आर्थिक लाभ देने से कभी पीछे नहीं हटना चाहती, लेकिन उसे स्थापित नियमों के साथ-साथ सरकारी खजाने की वास्तविक स्थिति और वित्तीय संसाधनों का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है।

सुक्खू ने जोर देकर कहा कि सरकारी नीतियों और न्यायिक फैसलों के बीच एक स्वस्थ संतुलन होना बेहद जरूरी है, ताकि विकास कार्य और जनहित से जुड़ी योजनाएं प्रभावित न हों। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का वास्तविक उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा का भरोसा कायम करना है।

 

पहाड़ी क्षेत्रों में खेल मैदानों के साझा उपयोग और अधोसंरचना पर बल

हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में बड़े खेल मैदानों का निर्माण करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में स्कूलों और स्थानीय समुदायों के खेल मैदानों का साझा उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि उपलब्ध संसाधनों का सबसे बेहतर इस्तेमाल हो सके। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय की अनुमति और निर्धारित शर्तों के तहत सरकारी स्कूल के मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने के लिए राज्य सरकार ने पहली बार पांच लाख रुपये का भुगतान किया है।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, शिमला के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से एनएलयू शिमला को शिक्षा और शोध के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कानून के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में आधुनिक तकनीक सीखने और बदलते समय के अनुरूप खुद को तैयार करने की सलाह दी।

 

मेधावी छात्रों को मिले गोल्ड मेडल और दिग्गजों को मानद उपाधि

दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने विद्यार्थियों को डिग्रियां वितरित कीं। समारोह का मुख्य आकर्षण देश के न्यायिक जगत की दिग्गज हस्तियों को सम्मानित करना रहा, जिसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. रामचंद्र राव और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश त्रिलोक सिंह चौहान को विधि एवं न्याय के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए ‘डॉक्टर ऑफ लॉ’ की मानद उपाधि से नवाजा गया।

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