रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM) कुफरी, शिमला में हिम आंचल शेफ एसोसिएशन द्वारा हिमाचल कुलिनरी एंड टूरिज्म फेस्टिवल का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक पकवानों का अवलोकन किया और प्रतिभागी युवाओं से बातचीत की।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जो समाज अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और स्थानीय खान-पान को उत्सव के रूप में सहेजता है, वह वास्तव में अपनी जड़ों को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि आज हिमाचल की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और अपने पारंपरिक व्यंजनों के हुनर को व्यवसाय का रूप देकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं।
पारंपरिक पकवानों को नियमित व्यवसाय और आजीविका से जोड़ने पर बल
उपायुक्त ने कहा कि हिमाचली व्यंजनों को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों तक सीमित रखने के बजाय नियमित भोजन और व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बल दिया कि स्थानीय खाद्य संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के साथ-साथ उसके मूल स्वरूप, पारंपरिक स्वाद और प्रामाणिकता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
वैश्विक बाजार में उतरने से पहले गुणवत्ता और अनुसंधान जरूरी
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने युवा उद्यमियों को सलाह दी कि हिमाचली उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने से पहले उनके स्वाद, प्रस्तुति, हाइजीन, तापमान और समय प्रबंधन पर गहन शोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पूरी तैयारी, परीक्षण और फीडबैक के किसी भी खाद्य उत्पाद को बाजार में लॉन्च नहीं किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों के नवाचार की सराहना, खाद्य सुरक्षा को बताया पहली शर्त
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों द्वारा हिमाचली व्यंजनों को नए कलेवर में पेश करने के प्रयासों की सराहना की गई। उपायुक्त ने कहा कि खाद्य व्यवसाय में उपभोक्ता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है, इसलिए एथिक्स, फूड सेफ्टी और हाइजीन के मानकों का कड़ाई से पालन होना आवश्यक है।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान
खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित और ताजा रखने के लिए उपायुक्त ने आधुनिक उपकरणों तथा आधारभूत ढांचे में निवेश की आवश्यकता बताई। उन्होंने युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी सरकारी ऋण व सब्सिडी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने स्टार्टअप को बड़ा रूप देने के लिए प्रेरित किया।
451 प्रकार के सिड्डू, कांगड़ी धाम और बिच्छू बूटी की चाय रही मुख्य आकर्षण
प्रदर्शनी में कांगड़ी धाम, सिड्डू, पतरोड़े, गुच्छी की सब्जी, सेपू बड़ी, लाल चावल, बिच्छू बूटी की चाय, कोदरे की रोटी और चम्बयाली राजमा जैसे पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान 451 प्रकार के सिड्डू बनाकर लिम्का बुक में नाम दर्ज कराने वाले शेफ नंदलाल और उनकी टीम सहित विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को मेडल व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।