पहाड़ों में सुरक्षित और टिकाऊ सफर का नया खाका: हिमाचल सरकार ने सड़क प्रबंधन में जोड़े आधुनिक तकनीक, ड्रेनेज नीति और डिजिटल मैपिंग के आयाम

रमेश कंवर: शिमला

Himachal News: प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश के सड़क बुनियादी ढांचे को आधुनिक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। राज्य के दुर्गम भू-भाग और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों, सुदृढ़ जल निकासी व्यवस्था, त्वरित रखरखाव और डिजिटल निगरानी पर विशेष बल दिया जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बागवानी की मुख्य जीवनरेखा हैं। शून्य से शुरुआत कर राज्य में सड़क नेटवर्क 31 अगस्त 2026 तक 41,903 किलोमीटर मोटर योग्य सड़कों तक पहुंच चुका है, जो प्रदेश के 15,608 गांवों को आपस में जोड़ता है। इस विशाल नेटवर्क की दीर्घकालिक मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई नए नीतिगत कदम उठाए हैं।

फरवरी 2026 में लागू हुई नई सड़क जल निकासी नीति

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का सबसे बड़ा कारण जलभराव को माना जाता है। इस समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में सड़क जल निकासी नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत सड़क योजना एवं डिजाइन में ही अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम को अनिवार्य अंग बनाया गया है।

एंबुलेंस लिंक सड़कों के लिए जारी किए गए नए दिशा-निर्देश

अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाने के उद्देश्य से जीप और एंबुलेंस लिंक सड़कों के निर्माण, डिजाइन, चौड़ाई और ढलान संरक्षण के लिए एक समान दिशा-निर्देश अधिसूचित किए गए हैं ताकि दूरदराज के क्षेत्रों को भी मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

संशोधन विधेयक 2026 के जरिए सड़क परिसंपत्तियों की होगी डिजिटल मैपिंग

हिमाचल प्रदेश सड़क बुनियादी ढांचा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से सड़कों की जीआईएस और भू-समन्वित डिजिटल मैपिंग की जाएगी, जिससे क्षतिग्रस्त सड़क परिसंपत्तियों की तुरंत पहचान कर उनकी समयबद्ध बहाली संभव हो सकेगी।

मानसून में स्थिति बताने के लिए बनेगा सेंट्रलाइज़्ड रोड स्टेटस सिस्टम

सड़क प्रबंधन को सुचारू बनाने के लिए एक केंद्रीकृत रोड स्टेटस इन्फॉर्मेशन सिस्टम और डिजिटल बिलिंग हेतु वर्क्स एंड अकाउंट्स मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम लागू किया जा रहा है, जो मानसून या आपदा के समय जनता को सड़कों के बंद होने और खुलने की सटीक जानकारी देगा।

जुलाई 2026 में स्वीकृत सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति से बढ़ेंगे सुरक्षा मानक

जुलाई 2026 में स्वीकृत सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति के तहत निर्माण के हर चरण में सुरक्षा जांच अनिवार्य की गई है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) मुख्यालय में एक समर्पित ‘सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ’ की स्थापना की जा रही है।

गड्ढों की मरम्मत के लिए SOP जारी

सड़कों के त्वरित रखरखाव और पैच-वर्क के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। इसके अलावा, बार-बार खुदाई रोकने के लिए बिजली, पानी और दूरसंचार लाइनों हेतु बहु-उपयोगिता भूमिगत डक्ट विकसित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

खबरें और भी हैं...