Success Story: हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री विधवा, एकल, निराश्रित, दिव्यांग महिला आवास योजना’ प्रदेश की बेसहारा और एकल नारियों के लिए नई उम्मीद की किरण बन कर उभरी है। यह योजना जरूरतमंद महिलाओं के कच्चे और असुरक्षित मकानों को पक्के आशियानों में बदलकर उनकी जिंदगी संवारने में बड़ी भूमिका निभा रही है। मंडी जिले में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाली पात्र महिलाओं को ‘हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड’ के माध्यम से पक्के घर के निर्माण के लिए 3-3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
मंडी जिले की पधर तहसील के सियूंह गांव की पदमा देवी इस योजना की प्रत्यक्ष मिसाल हैं। वर्ष 2007 में पति के निधन के बाद छोटे बच्चों के पालन-पोषण और परिवार को चलाने की पूरी जिम्मेदारी पदमा देवी के कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी करने के साथ नारला में सब्जियां बेचकर और मनरेगा में मजदूरी करके अपने परिवार को संभाला, लेकिन बरसों तक वे कच्चे ‘टापरू’ में रहने को मजबूर रहीं। आवास योजना के तहत 3 लाख रुपये स्वीकृत होने के बाद मिली दो किस्तों की राशि से उनके पक्के मकान का स्लैब डल चुका है। अपनी खुशी साझा करते हुए पदमा देवी ने कहा, “आस्सा गरीबा जो रहणा पौणा था इन्हां टापरूआ अंदर हे, ये ता सरकारा रा धन्यावाद जे इन्हें आसा रे कट्ठे ऐहड़ी खरी स्कीमा चलाई री।”
टपकती छत से मिली मुक्ति, सुराहन गांव की कुसमा देवी का भी सपना हुआ पूरा
इसी तहसील के सुराहन गांव की निवासी कुसमा देवी के पति का वर्ष 2024 में निधन हो गया था। दो छोटे बच्चों के लालन-पालन के लिए कुसमा देवी ने मनरेगा में मजदूरी शुरू की। बारिश के दिनों में कच्चे घर की छत टपकने से उनका जीवन काफी मुश्किलों से गुजर रहा था। मनरेगा के माध्यम से कामगार कल्याण बोर्ड में आवेदन करने के बाद उन्हें भी 3 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ। पहली दो किस्तों की मदद से उन्होंने मकान की छत का स्लैब तैयार कर लिया है और तीसरी किस्त मिलते ही शेष निर्माण कार्य भी पूरा हो जाएगा। कुसमा देवी का कहना है कि सुक्खू सरकार की इस संवेदनशील मदद से उनके परिवार को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने का संबल मिला है।
मंडी जिले की 16 एकल नारियों के जीवन में नई उम्मीद का उजाला
जिला प्रशासन मंडी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले की 16 एकल नारियों के पक्के आशियाने के निर्माण हेतु 3-3 लाख रुपये की कुल धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। इनमें से 4 लाभार्थी महिलाओं को निर्माण प्रगति के आधार पर दो-दो किस्तें जारी कर दी गई हैं, जबकि अन्य 12 महिलाओं को 15 अगस्त 2026 को पहली किस्त हस्तांतरित की गई है। यह योजना महज एक वित्तीय सहायता भर नहीं है, बल्कि प्रदेश की असहाय, विधवा और एकल महिलाओं के स्वाभिमान, सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।