रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: राज्य सरकार द्वारा प्रदेशवासियों को पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुखी सुशासन उपलब्ध करवाने के लिए उठाए गए कदमों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश भर में चलाई जा रही राजस्व लोक अदालतों और विशेष राजस्व लोक अदालतों की अभिनव पहल के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। अब तक इन लोक अदालतों के जरिए 5,44,000 से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63,000 से अधिक निशानदेही के मामलों का सफलता पूर्वक निपटारा किया जा चुका है। इसके अलावा राजस्व अभिलेख में 26,288 दुरुस्ती कार्य भी संपन्न किए गए हैं।
लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए अक्टूबर 2023 से हर महीने के अंतिम दो दिनों में तहसील और उप-तहसील स्तर पर राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही जनवरी 2026 से तकसीम और दस्तावेजों में सुधार के लिए हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को तीन दिवसीय विशेष राजस्व लोक अदालतें लगाई जा रही हैं। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हो रही है, जिन्हें पहले भूमि संबंधी कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।
पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में बड़ा कदम, दूरदराज के लोगों को मिली राहत
इन लोक अदालतों के आयोजन से आम जनता के समय और धन दोनों की बचत हो रही है। राजस्व संबंधी दस्तावेजों में त्रुटियों का सुधार और भूमि विवादों का समयबद्ध निपटारा होने से प्रशासनिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही और अधिक मजबूत हुई है। प्रदेश के नागरिक इस पहल से काफी उत्साहित हैं और सरकार के इस जन-केंद्रित कदम पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
आमजन को सुलभ और त्वरित सेवाएं देना सरकार की मुख्य प्राथमिकता: मुख्यमंत्री सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्व मामले सीधे तौर पर परिवारों और भूमि मालिकों के हितों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका समय पर समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुधारात्मक प्रक्रियाओं को आगे भी जारी रखा जाएगा ताकि लोगों को अपने जायज कामों के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े और जन-केन्द्रित शासन प्रणाली को और अधिक मजबूती मिले।