रमेश कंवर: शिमला
Shimla News: राजधानी शिमला में पेयजल संकट गहराने के बाद राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने कांग्रेस सरकार और नगर निगम शिमला पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि शिमला शहर से पानी गायब हो गया है और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में लोगों को चौथे दिन भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। जिस शिमला में 24 घंटे निर्बाध पानी देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, वहां आज आम जनता को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कर्ण नंदा ने 972 करोड़ रुपये की 24×7 पेयजल योजना में सामने आ रही भारी अनियमितताओं और सुस्त रफ्तार पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस महत्वाकांक्षी परियोजना को शिमला की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान बताया जा रहा था, आज उसकी सुस्त चाल और कमियों के चलते मुख्यमंत्री कार्यालय को जांच के आदेश देने पड़े हैं। भाजपा ने मांग की है कि इतने बड़े बजट वाली परियोजना की समय रहते सही निगरानी क्यों नहीं की गई और योजना जांच के घेरे में कैसे आ पहुंची, इसका जवाब सरकार को जनता को देना चाहिए।
5500 में से एक भी नया कनेक्शन नहीं, 19 में से एक भी टैंक नहीं बना तैयार
भाजपा मीडिया संयोजक ने योजना की जमीनी स्थिति पर आंकड़े साझा करते हुए कहा कि परियोजना के तहत 5,500 नए कनेक्शन दिए जाने थे, लेकिन नई लाइन से अभी तक एक भी कनेक्शन नहीं जुड़ा है। इसके अलावा प्रस्तावित 19 पानी के टैंकों में से एक भी टैंक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। 136 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में से केवल 51 किलोमीटर और 27 किलोमीटर फीडर लाइन में से महज 5 किलोमीटर का ही काम हो सका है। क्लोरीनेशन और नॉन-रेवेन्यू वाटर पर शून्य काम होने के खुलासे ने व्यवस्था की पोल खोल दी है।
कंपनी और अधिकारियों की तय हो जवाबदेही, निष्पक्ष हो जांच: कर्ण नंदा
कर्ण नंदा ने मांग उठाई है कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा बिठाई गई जांच पूरी तरह निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए। इसमें ठेका लेने वाली कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट शर्तों, कार्य की गुणवत्ता, समयसीमा, ऑपरेशन व मेंटेनेंस के नाम पर हुए भुगतान तथा दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने योजना में कमियां उजागर करने वाले अधिकारी के अचानक हुए तबादले पर भी सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की और कहा कि शिमला की जनता को कागजी दावों की जगह नलों में पानी चाहिए।