Mandi News: बेटी का विवाह हर परिवार के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक पड़ाव होता है, जिसे यादगार बनाने के लिए अभिभावक अपनी सामर्थ्य से बढ़कर प्रयास करते हैं। हालांकि, आर्थिक रूप से कमजोर और निर्धन परिवारों के लिए शादी का भारी-भरकम खर्च अक्सर गहरी चिंता का सबब बन जाता है। ऐसे ही जरूरतमंद परिवारों के सम्बल के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की ‘शगुन योजना’ एक नई आशा और बड़ा संबल बनकर उभरी है। यह योजना बीपीएल परिवारों की बेटियों के आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित कर रही है।
Mandi News: बीपीएल परिवार की बेटी के विवाह पर 31 हजार रुपये का अनुदान
शगुन योजना के प्रावधानों के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की बेटियों के विवाह के लिए प्रदेश सरकार 31 हजार रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना का लाभ बेटी के माता-पिता या कानूनी संरक्षक के अतिरिक्त स्वयं पात्र बेटी भी ले सकती है। योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि हिमाचल प्रदेश की स्थायी निवासी पात्र बेटी का विवाह राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य के युवक के साथ होता है, तब भी वह इस विवाह अनुदान की पूर्ण हकदार रहती है।
करसोग में 187 बेटियों को मिली 57.97 लाख रुपये की सहायता
उपमंडल करसोग में शगुन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से धरातल पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। पिछले लगभग 4 वर्षों के दौरान करसोग क्षेत्र में 187 पात्र बेटियों के परिवारों को कुल 57 लाख 97 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे वितरित की गई है। यह सहयोग केवल वित्तीय आंकड़ा नहीं, बल्कि उन 187 परिवारों के लिए बड़ी राहत का जरिया बना है, जिन्हें विवाह की आवश्यक रस्मों और व्यवस्थाओं के समय आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ा।
इन्हें मिल लाभ
योजना का लाभ प्राप्त करने वाले करसोग क्षेत्र के दच्छैण निवासी प्रेम सिंह, लोअर करसोग निवासी राम लाल और सनारली निवासी जगदीश कुमार ने बताया कि उन्हें बेटियों की शादी के समय सरकार से 31-31 हजार रुपये का शगुन मिला। उन्होंने कहा कि इस समय पर मिली सहायता से विवाह के आवश्यक कार्यों को पूरा करने में भारी मदद मिली। वहीं, बाल विकास परियोजना अधिकारी करसोग इंद्र सिंह ने पुष्टि की कि विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के तहत सभी पात्र परिवारों को पारदर्शी तरीके से राशि जारी की गई है।
सामाजिक सुरक्षा और सम्मान की मिसाल बनी योजना
कल्याणकारी नीतियों की सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सीधी मदद पहुंचे। शगुन योजना के जरिए सरकार ने निर्धन परिवारों के भीतर यह अटूट विश्वास पैदा किया है कि बेटी के कन्यादान जैसे पवित्र और बड़े सामाजिक दायित्व में वे अकेले नहीं हैं। यह संवेदनशील पहल बेटियों के प्रति सम्मान, गरिमा और लैंगिक समानता की दिशा में राज्य सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।