रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ राष्ट्रव्यापी अभियान तब तक अनवरत जारी रहेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाकर जेल नहीं भेजा जाता। लांबा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश के 13 करोड़ से अधिक वैध नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर गहरा आघात किया है, जिसे देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए अलका लांबा ने ‘चलो दिल्ली, वोट चोर गद्दी छोड़, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ’ महारैली का पोस्टर जारी किया। उन्होंने कहा कि आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 10 लाख से अधिक लोग एकत्र होकर इंडिया गठबंधन की इस महारैली को ऐतिहासिक बनाएंगे।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में जुटेगा जनसैलाब, महिलाओं को दिया न्योता
अलका लांबा ने पत्रकार वार्ता के दौरान हिमाचल प्रदेश के नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं को 1 नवंबर की महारैली में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और बाबा साहेब के संविधान की रक्षा का साझा जन-आंदोलन है, जिसमें विपक्षी गठबंधन के सभी दल एकजुटता के साथ खड़े हैं।
उन्होंने बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने हाल ही में राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुनाव आयोग की संदेहास्पद कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) के नाम पर वोटर लिस्ट से बाहर किए गए 13 करोड़ मतदाताओं के ठोस व पुख्ता प्रमाण सौंपे हैं। पार्टी जनता के बीच जाकर यह सवाल उठा रही है कि क्या देश में हर नागरिक के वोट की रक्षा हो रही है और क्या चुनाव प्रणाली वाकई निष्पक्ष है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर मनमानी का आरोप, फॉर्म-6 में बदलाव पर उठाए सवाल
अलका लांबा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्होंने अपने अधिकारों की सीमा लांघते हुए फॉर्म-6 में मनमाने ढंग से बदलाव किए। इस गंभीर विसंगति पर चुनाव आयोग के ही दो चुनाव आयुक्तों ने महज 10 दिनों के भीतर कैबिनेट सचिव को 14 आपत्ति पत्र भेजे। उन्होंने कहा कि इन आंतरिक खुलासों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
साथ ही उन्होंने नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को दुर्भायपूर्ण करार देते हुए कहा कि ऐसा केवल चुनाव आयोग को सरकार की कठपुतली बनाने के उद्देश्य से किया गया।
गृह मंत्री अमित शाह से मांगा इस्तीफा, कांग्रेस की तीन सूत्रीय मांगें सार्वजनिक
केंद्र सरकार को घेरते हुए महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि जिन 13 करोड़ भारतीय नागरिकों को तथाकथित घुसपैठिया बताकर मतदाता सूची से बाहर किया गया, वे देश में कब आए। यदि वे 2014 के बाद आए हैं, तो इसका सीधा दायित्व केंद्र की भाजपा सरकार का बनता है और ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से जानबूझकर उन दलितों, गरीबों और आदिवासियों के नाम काटे गए हैं, जो भाजपा की नीतियों का समर्थन नहीं करते।
अलका लांबा ने कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें दोहराते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त तत्काल इस्तीफा दें और जेल जाएं, एसआईआर को तुरंत रद्द कर वोट चोरी रोकी जाए तथा आगामी चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से पारदर्शी मतदान सुनिश्चित किया जाए।
रामलीला मैदान में बाधा न डालने की चेतावनी, मोदी सरकार पर साधा निशाना
पत्रकार वार्ता के समापन पर अलका लांबा ने केंद्र पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अधिकार को छीना और अब रामलीला मैदान में रैली के लिए भारी भरकम फीस थोप दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि 1 नवंबर की महारैली में दिल्ली पुलिस के जरिए किसी भी प्रकार का व्यवधान पैदा करने की कोशिश न की जाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय खुलासों के बाद दबाव में है और अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।