रमेश कंवर: केलांग
Keylong News: पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों पर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है और लोगों से हस्ताक्षर करवा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस चुनाव आयोग की निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से आज कांग्रेस के नेता हिमाचल प्रदेश में सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे हैं, उसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाना पूरी तरह से अनुचित है।
रवि ठाकुर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी को देश की स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है, तो सत्ता में बैठे कांग्रेस नेताओं को सबसे पहले नैतिकता के आधार पर अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी सहूलियत के हिसाब से संवैधानिक संस्थाओं की तारीफ करना और हार या घबराहट में उन पर आरोप लगाना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुकी है।
महिलाओं के ₹500 फॉर्म और हस्ताक्षर अभियान पर जनता को न करें गुमराह
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश की महिलाओं को 1500 रुपए देने के लिए आवेदन करवाने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के विरोध में लोगों से हस्ताक्षर करवाने का अभियान दो पूरी तरह से अलग-अलग विषय हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि इन दोनों मुद्दों को आपस में मिलाकर जनता के बीच किसी भी प्रकार के भ्रम और गफलत की स्थिति पैदा करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
10 गारंटियों के वादों पर स्थिति स्पष्ट करे राज्य सरकार
रवि ठाकुर ने विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा दी गई 10 गारंटियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार में आने के इतने समय बाद भी प्रदेश की जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है और कांग्रेस को अपनी इन गारंटियों की वर्तमान स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी वादों को पूरा करने में सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है और अब ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
लाहौल-स्पीति की जागरूक जनता को राजनीतिक नारों से नहीं किया जा सकता गुमराह
रवि ठाकुर ने जोर देकर कहा कि लाहौल-स्पीति की जनता बेहद जागरूक और समझदार है। उसे खोखले राजनीतिक नारों, अभियानों या गुमराह करने वाले बयानों के माध्यम से कभी भ्रमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्र के लोगों को केवल राजनीतिक वादों से नहीं, बल्कि धरातल पर हुए वास्तविक विकास कार्यों और स्पष्ट जवाबदेही से मतलब है।