National News: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी संगठन में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। मायावती ने अपने भतीजे और पूर्व राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए बसपा से पूरी तरह ‘आजाद’ (निष्कासित) करने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को ‘अति-देर से उठाया गया सही कदम’ करार दिया है।
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर 10 बिंदुओं की विस्तृत पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि यदि अशोक सिद्धार्थ यह फैसला बहुत पहले ले लेते, तो बसपा, बहुजन मूवमेंट और खुद उनके दामाद आकाश आनंद को लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी हित में उन्हें यह कड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
आकाश आनंद पर लगाया परिवारवाद का आरोप
मायावती ने आकाश आनंद पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर और पार्टी के प्रति निष्ठा से अधिक प्राथमिकता अपने ससुर को दी। उन्होंने कहा कि आकाश ने पार्टी की नीतियों और शीर्ष नेतृत्व के दिशा-निर्देशों का पालन करने में लापरवाही बरती। मायावती ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से मुक्त किया गया था, उसी क्रम में अब उन्हें पार्टी से पूरी तरह आजाद कर दिया गया है। यदि वे स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो रहने के लिए स्वतंत्र हैं।
कार्यकर्ताओं से यूपी में पांचवीं बार सरकार बनाने का आह्वान
अंबेडकरवादी राजनीति का हवाला देते हुए मायावती ने कहा कि बसपा की परंपरा त्याग, तपस्या, संघर्ष और पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की रही है, जिसके लिए वह खुद भी पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से विरोधियों की साजिशों का डटकर मुकाबला करने की अपील की। मायावती ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश में एक बार फिर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की सोच वाली कानून-व्यवस्था और विकास केंद्रित सरकार बनाने के संकल्प के साथ मैदान में जुट जाएं।