ब्यास ड्रेजिंग पर घिरी सुक्खू सरकार: बिना बेस वैल्यू और बैंक गारंटी के खनन का आरोप, सुधीर शर्मा बोले- 20 करोड़ के लेन-देन की ED करे जांच

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रमेश कंवर: शिमला

Himachal Politics: कुल्लू जिले में ब्यास नदी के तटीकरण और ड्रेजिंग कार्य को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत में बड़ा भूचाल आ गया है। धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि खनन विभाग को दरकिनार कर वन विभाग के जरिए अवैध रूप से खनन करवाया गया, जिसमें न तो बेस वैल्यू प्राइस जमा हुआ और न ही अनिवार्य बैंक गारंटी ली गई। सुधीर शर्मा ने इस पूरे मामले को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने योग्य बताया है।

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि ब्यास नदी में ड्रेजिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर खनिज संपदा निकाली गई। सामान्य खनन नियमों के तहत सरकार को मिलने वाली अग्रिम बेस वैल्यू राशि और बैंक गारंटी जमा ही नहीं करवाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि इन वित्तीय औपचारिकताओं को पूरा किए बिना कार्य आगे बढ़ाने की हरी झंडी किस स्तर पर और किस सक्षम अधिकारी के आदेश से दी गई? इससे प्रदेश के सरकारी खजाने को मिलने वाली करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और राजस्व का भारी नुकसान हुआ है।

 

कैबिनेट वाया सर्कुलेशन मंजूरी और केंद्रीय नियमों का उल्लंघन

सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि वन विभाग को माइनिंग का काम सौंपने के लिए कैबिनेट की मंजूरी आनन-फानन में ‘वाया सर्कुलेशन’ ली गई। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी कौन सी आपात स्थिति थी जिसके चलते नियमित कैबिनेट बैठक का इंतजार किए बिना गोपनीय तरीके से फैसला थोपा गया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के मौजूदा वैधानिक नियमों के मुताबिक वन विभाग खनन करवाने के लिए अधिकृत एजेंसी नहीं है। यदि कोई विशेष केंद्रीय अनुमति ली गई थी, तो सरकार उसके आधिकारिक दस्तावेज जनता के सामने रखे।

 

कुल्लू के प्रभावशाली नेता और 20 करोड़ के कथित लेन-देन का दावा

सुधीर शर्मा ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस पूरे खेल के पीछे कुल्लू के एक बेहद प्रभावशाली नेता का हाथ है, जिनके दबाव में खनन विभाग से काम छीनकर वन विभाग को सौंपा गया। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक गलियारों में चल रही उस चर्चा का भी हवाला दिया जिसमें एक कांग्रेस नेत्री को 20 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इन वित्तीय आरोपों को खारिज करने के बजाय सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

 

विभागीय नहीं, ED की जांच के लिए फिट केस

भाजपा विधायक ने जोर देकर कहा कि यह केवल विभागीय चूक नहीं बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और सुनियोजित वित्तीय अपराध का मामला बनता है। सुधीर शर्मा ने सरकार से पांच मुख्य बिंदुओं पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की:

  1. नदी से कुल कितनी खनिज सामग्री निकाली गई और उसका बाजार मूल्य क्या था?
  2. सरकार को कितनी रॉयल्टी मिलनी थी और असल में कितनी जमा हुई?
  3. अनिवार्य बैंक गारंटी किसके दबाव में माफ या नजरअंदाज की गई?
  4. निकाली गई खनिज सामग्री कहां बेची या डंप की गई?
  5. कैबिनेट वाया सर्कुलेशन की फाइल नोटिंग्स और केंद्रीय अनुमतियों का पूरा ब्योरा क्या है?

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