रमेश कंवर: शिमला
राजधानी शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान जाखू मंदिर (Jakhu Temple) आज अपने 108 फीट ऊंचे विशालकाय विग्रह, आधुनिक रोपवे और पक्के परिसरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 114 साल से भी पहले यह पावन स्थल कैसा दिखता था? वर्ष 1912 का एक दुर्लभ ऐतिहासिक पोस्टकार्ड उस दौर के जाखू मंदिर की एक ऐसी झलक पेश करता है, जो आज के भव्य और व्यस्त स्वरूप से बिल्कुल जुदा है।
7 सितंबर 1912 का वह ऐतिहासिक पोस्टकार्ड
यह ऐतिहासिक तस्वीर दरअसल एक पोस्टकार्ड है, जिसे पर्ल एलेन इसाबेला स्टीफंस (Pearl Ellen Isabella Stephens) ने 7 सितंबर 1912 को क्रिस्टोफर बर्क मेयस (Christopher Burke Mayes) को डाक के जरिए भेजा था। 114 साल पुराने इस चित्र में जाखू पहाड़ी की शांत ढलान पर एक बेहद छोटा, सादगीपूर्ण और पारंपरिक पहाड़ी शैली में बना देवालय साफ दिखाई देता है।
न कंक्रीट की सड़कें, न आधुनिक निर्माण
तस्वीर उस दौर के शिमला के अछूते प्राकृतिक सौंदर्य को बयां करती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए आज जैसी कंक्रीट या चौड़ी सड़कें नहीं थीं, केवल पत्थरों को तराश कर बनाई गई कच्ची-पक्की सीढ़ियां और संकरा रास्ता दिखाई देता है। मंदिर के इर्द-गिर्द देवदार और बांज के घने जंगल और प्राकृतिक पहाड़ी झाड़ियां फैली हुई हैं। किसी भी आधुनिक निर्माण का नामोनिशान तक नहीं है। तस्वीर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि मंदिर परिसर और सीढ़ियों के आसपास कई बंदर बैठे दिखाई देते हैं। यह प्रमाण है कि जाखू के वानर केवल आज का दृश्य नहीं, बल्कि सदियों से इस पावन धाम के अभिन्न अंग रहे हैं।
1817 के ब्रिटिश दस्तावेजों में भी मिलता है उल्लेख
जाखू मंदिर का इतिहास 1912 से भी कहीं अधिक प्राचीन है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1817 में ब्रिटिश अधिकारी कैप्टन अलेक्जेंडर जेरार्ड (Captain Alexander Gerard) ने अपने यात्रा वृत्तांत में जाखू क्षेत्र में स्थित एक मंदिर का स्पष्ट उल्लेख किया था। इससे साबित होता है कि अंग्रेजों द्वारा शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने से काफी पहले से ही यह स्थल स्थानीय लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ था।
समय के साथ पूरी तरह बदल चुका है जाखू मंदिर का स्वरूप
समय के पहिए के साथ जाखू मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है, लेकिन यह सदी पुराना पोस्टकार्ड शिमला के इतिहास और उसकी आध्यात्मिक जड़ों का एक नायाब दस्तावेज है। यह दुर्लभ पोस्टकार्ड शिमला के स्वर्णिम इतिहास और जाखू मंदिर के क्रमिक विकास की एक अनमोल धरोहर है।