लाहुल के पवित्र ड्रिलबु पर्वत पर उमड़ा जनसैलाब, 7वीं सदी की गुफाओं की परिक्रमा कर दिया प्रेम व सद्भाव का संदेश

Himachal News Lahaul Drilbu Ri Mountain Eco Padyatra

रमेश कंवर: मनाली

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहुल-स्पीति के पवित्र संगम स्थल तांदी के ठीक ऊपर स्थित पावन ड्रिलबु री (घंटा गिरी) पर्वत की परिक्रमा के लिए ऐतिहासिक ‘इको पदयात्रा’ का आयोजन किया गया। ‘यंग ड्रकपा एसोसिएशन’ द्वारा आयोजित इस धार्मिक व पर्यावरण-संरक्षण पदयात्रा में लाहुल, लद्दाख, ज़ंस्कर, पाडर, किन्नौर और स्पीति घाटी से आए हजारों बौद्ध धर्मावलंबियों ने पूर्ण धार्मिक उत्साह, आस्था और निष्ठा के साथ बढ़-चढ़कर भाग लिया।

तांदी स्थित चंद्रभागा संगम के शीर्ष पर विराजमान ड्रिलबु पर्वत को महान बौद्ध आचार्य मतीसार (गुरु घंटापा) का तपस्थली व पीठ स्थान माना जाता है। इतिहास के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय के महान आचार्य मतिसार 7वीं शताब्दी में लाहुल आए थे और उन्होंने ड्रिलबु री पर्वत की प्राकृतिक गुफाओं में वर्षों तक कठोर तपस्या व साधना की थी।

ड्रिलबु री पर्वत बौद्ध धर्म के ‘करगयुद्पा सम्प्रदाय’ के इष्ट देव ‘चक्रसंवर’ का भी पावन पीठ स्थान माना जाता है, जिस कारण बौद्ध समुदाय में इसका आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। इस पावन पर्वत के महान धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए इससे पूर्व परम पावन 14वें दलाई लामा, गलदान त्रिपा, गेलौंग ड्रकपा और तकसंग रिम्पोछे जैसी विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक हस्तियां भी घंटा गिरी की कठिन यात्रा कर आशीर्वाद प्राप्त कर चुकी हैं।

यात्रा के दौरान बौद्ध रत्नों और धर्मगुरुओं ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि सच्ची आध्यात्मिकता में वह असीम शक्ति निहित है, जो समाज में फैली नफरत, ईर्ष्या और कटुता को आसानी से आपसी स्नेह, करुणा और प्रेम में बदल सकती है।

पदयात्रा के समापन पर आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रवचन देते हुए कहा कि केवल बाहरी सांसारिक अनुष्ठान और आडंबरपूर्ण कर्मकांड महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि मनुष्य की आंतरिक बुद्धिमत्ता, तर्कशक्ति और विचार इतने शक्तिशाली होने चाहिए जो मन के भीतर छिपी नकारात्मक प्रवृत्तियों को जड़ से समाप्त कर सकें।

उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं और युवाओं से समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने का आह्वान किया। इस इको पदयात्रा के माध्यम से जहां एक ओर श्रद्धालुओं ने ड्रिलबु री की परिक्रमा कर पुण्य कमाया, वहीं दूसरी ओर पवित्र हिमालयी क्षेत्र को स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त रखने का सामूहिक संकल्प भी दोहराया।

खबरें और भी हैं...