रमेश कंवर: शिमला
Education News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों से राज्य की भौगोलिक और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। सोलन में ‘निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग’ द्वारा आयोजित एक शैक्षणिक सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम बदलाव, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा और सतत् पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सार्थक अनुसंधान प्रदेश के हितों की रक्षा कर सकता है।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों को केवल शिक्षा का केंद्र न मानकर प्रदेश के समग्र विकास का महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के विस्तार और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उद्योग जगत तथा शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बेहद आवश्यक है। इसके बिना राज्य में गुणात्मक विकास और स्वरोजगार के बेहतर अवसरों की कल्पना नहीं की जा सकती।
रोजगार के अवसरों के अनुसार पाठ्यक्रम अद्यतन करने पर जोर
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे उभरते हुए रोजगार के नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ्यक्रमों को अद्यतन करे। इसके साथ ही संकाय विकास, अनुसंधान सहयोग, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल अब 21वें स्थान से आगे बढ़कर 5वां स्थान हासिल कर चुका है।
शिक्षा ढांचे का हो रहा समग्र विकास, स्कूल हो रहे सीबीएसई से संबद्ध
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार बहुसुविधा संपन्न राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण कर रही है। इसके अलावा 156 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया जा चुका है और अगले वर्ष 100 अन्य स्कूलों को भी इस बोर्ड से जोड़ा जाएगा। सम्मेलन में छात्रों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने जल संरक्षण, प्राकृतिक कृषि और सौर ऊर्जा से ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने का भी आह्वान किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल, विधायक संजय अवस्थी और विनोद सुल्तानपुरी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।