Ladakh: लद्दाख की धरती पर पहली बार केसर की खेती

13 घंटे पहले

रमेश कंवर: लद्दाख

Ladakh: ठंडे रेगिस्तान के नाम से मशहूर लद्दाख में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर (Saffron) की खेती का ऐतिहासिक प्रयोग किया गया है। स्पितुक फारका के कमांड एरिया में गेट नंबर-27 के पास करीब 4,000 वर्गमीटर बंजर जमीन पर 90 हजार उच्च गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के कंद रोपे गए हैं। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो लद्दाख की अनुपयोगी बंजर जमीन न केवल उपजाऊ बनेगी, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए आय और समृद्धि के नए द्वार भी खुलेंगे।

केसर की खेती के लिए खास सावधानी बरतते हुए आठ से 10 सेंटीमीटर परिधि, 2.5 से तीन सेंटीमीटर व्यास और कम से कम 10 ग्राम वजन वाले ईरानी कंदों का चयन किया गया है। लगभग 800 किलो वजनी इन कंदों को औसतन 22-23 कंद प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बोया गया है। कृषि विशेषज्ञ अब लद्दाख के अनुकूल तापमान, मिट्टी, पानी और ऊंचाई के बीच इस पहली फसल के परिणाम और गुणवत्ता का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।

 

इगू-पेई नहर और हिम सरोवर परियोजना से बंजर धरा में आई नमी

जिस स्थान पर यह प्रयोग किया जा रहा है, वह लेह में लगभग 800 एकड़ बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने के व्यापक प्रोजेक्ट का हिस्सा है। पास स्थित इगू-पेई सिंचाई नहर का अतिरिक्त पानी मोड़कर मिट्टी में आवश्यक नमी तैयार की गई है। इसके अलावा, क्षेत्र में ‘हिम सरोवर परियोजना’ के तहत चार बड़े जलाशय बनाए गए हैं, जिनकी कुल जल संग्रहण क्षमता लगभग 2.4 करोड़ लीटर है। इस प्रयास ने सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ कर बंजर जमीन को खेती योग्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

 

आंकड़े की नजर से केसर प्रोजेक्ट

कुल रोपाई क्षेत्र: 4,000 वर्गमीटर

रोपे गए कंदों की संख्या: 90,000

कंदों का कुल वजन: 800 किलोग्राम

पुनर्जीवित बंजर क्षेत्र: 800 एकड़

 

कश्मीर के बाद अब लद्दाख में हाई-वैल्यू फसल की नई शुरुआत

वर्तमान में देश के कुल केसर उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी जम्मू-कश्मीर की है। अब कश्मीर की तुलना में अधिक ऊंचाई और कठोर जलवायु वाले लद्दाख में इस हाई-वैल्यू फसल को आजमाना एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की विशिष्ट जलवायु में केसर जैसी फसल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की क्षमता रखती है। बंजर जमीन को उत्पादक संपत्ति में बदलना और किसानों की आय बढ़ाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।

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