हिमाचल की बेटी का हौसला देखिए: महज 22 साल की उम्र में 35 टन का ट्राला लेकर सड़कों पर दौड़ रही नीतू

रमेश कंवर

Himachal News: देवभूमि हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी कड़ी मेहनत, अदम्य साहस और हुनर का परचम लहरा रही हैं। इसी कड़ी में मंडी जिले के सरकाघाट क्षेत्र की 22 वर्षीय बेटी नीतू ने एक नया इतिहास रचते हुए समाज के सामने महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल पेश की है। नीतू कमर्शियल ट्रक ड्राइवर के रूप में फोरलेन और कठिन मार्गों पर भारी-भरकम वाहन चलाकर पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

जिस उम्र में अधिकांश युवा अपनी पढ़ाई और करियर की शुरुआत को लेकर राह तलाश रहे होते हैं, उस उम्र में नीतू ने भारी वाणिज्यिक वाहनों के अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे क्षेत्र को चुनकर अपने फौलादी इरादों का परिचय दिया है।

 

Himachal News: 16 टायरों वाला 35 टन का भारी ट्राला चलाने का हुनर

नीतू 16 टायरों वाला और 35 टन भार क्षमता का विशालकाय कमर्शियल ट्राला बेहद दक्षता, संतुलन और आत्मविश्वास के साथ चलाती हैं। भारी ट्रकों और लंबे ट्रालों को नियंत्रित करने के लिए जिस तकनीकी समझ, धैर्य और शारीरिक व मानसिक मजबूती की आवश्यकता होती है, नीतू ने उसे बखूबी साधकर दिखाया है। हाईवे और फोरलेन की सड़कों पर जब वह स्टेयरिंग थामकर फर्राटा भरती हैं, तो हर कोई इस युवा बेटी की हिम्मत और ड्राइविंग स्किल की भूरि-भूरि प्रशंसा करता नजर आता है।

 

रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ बनाई अपनी पहचान

व्यावसायिक ड्राइविंग को परंपरागत रूप से पुरुष वर्चस्व वाला कार्यक्षेत्र माना जाता रहा है, जहां लंबी दूरी का सफर, विषम परिस्थितियां और अनिद्रा जैसी कई कठिन चुनौतियां होती हैं। इन सभी सामाजिक बंधनों और पुरानी सोच को दरकिनार करते हुए नीतू ने इस पेशे को गर्व से अपनाया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि लगन, अनुशासन और मेहनत के आगे कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा होना चाहिए।

 

प्रदेश की लाखों बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

नीतू का यह संघर्ष और सफलता उन तमाम युवतियों के लिए एक बड़ा मार्गदर्शक है, जो लीक से हटकर अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि आत्मविश्वास मजबूत हो और लक्ष्य पर नजर टिकी हो, तो किसी भी राह की बाधाएं हौसलों को रोक नहीं सकतीं। सरकाघाट से निकली इस साहसी बेटी की सफलता पर आज न केवल उनका परिवार बल्कि समूचा हिमाचल प्रदेश गर्व महसूस कर रहा है।

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